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02 July, 2022

ग़ज़ल | प्यार की बातें करो | डाॅ (सुश्री) शरद सिंह

 


Ghazal - Nafraton Ke Daur Me .. Dr (Ms) Sharad Singh


ग़ज़ल

- डाॅ (सुश्री) शरद सिंह

नफ़रतों के  दौर में  मनुहार की बातें करो।

एकता की, मित्रता की, प्यार की बातें करो।

न मिले मौक़ा यहां  फ़िरक़ापरस्ती के लिए

आपसी सद्भाव की, सत्कार की बातें करो।

हम अमन औ शांति के पथ पर हमेशा ही चलें

विश्व में आतंकियों के हार की बातें करो।

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25 July, 2020

रात के स्याह लिफ़ाफ़े में... (शायरी) - डॉ शरद सिंह


रात के स्याह लिफ़ाफ़े में सितारे रख कर
दे गई  शाम  मुझे  ख़्वाब सुहाने रख कर
- डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh
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21 August, 2019

चाय का गिलास और ... - डाॅ शरद सिंह

Cheers by A Glass of Chai  - Dr (Miss) Sharad Singh
चाय का गिलास और मुट्ठी भर चिंतन
खुद ही आ जाती है लेखन में थिरकन
- डाॅ शरद सिंह

05 May, 2019

मगर इतना पता था ..( ग़ज़ल ) ... - डॉ शरद सिंह

Dr (Miss) Sharad Singh

मुझे मालूम था, तुझको  नहीं   मुझ  पर  यक़ीं होगा
मगर इतना पता था, मुझको खुद पर तो यक़ीं होगा
- डॉ शरद सिंह

08 April, 2019

कौन जाएगा भला ( ग़ज़ल ) ... - डॉ शरद सिंह

Kaun Jayega Bhala... Ghazal of Dr (Miss) Sharad Singh


ग़ज़ल

कौन जाएगा  भला   उसको  मनाने को
दिल नहीं करता हमारा सिर झुकाने को

इस क़दर जलने लगे हैं ख़्वाब आंखों में
अश्क़ की लहरें उठीं  उनको बुझाने को

जो गिरा है मुफ़लिसी की ठोकरें खाकर
कौन झुकता है भला, उसको उठाने को

दर्द का इक कारवां, है यहां ठहरा हुआ
हो न हो, वो ही गया उसको बुलाने को

वक़्त ने देखा नहीं हमको कभी मुड़कर
याद क्यूं करना भला, गुज़रे जमाने को


- डॉ ( सुश्री ) शरद सिंह

04 April, 2019

मेरे ख़्वाबों के शहर का (ग़ज़ल) ... - डॉ शरद सिंह

Mere Khwabon Ke Shahar Ka ... Ghazal of Dr (Miss) Sharad Singh

ग़ज़ल


मेरे ख़्वाबों के शहर का जो है पता तुझको
ज़रा बता भी दे अब उसका रास्ता मुझको

तू भी मिल-मिल के जमाने से आजमाता है
चाहता है जो सताना, तो फिर सता मुझको

तू  नज़ूमी  की  तरह  बांचता  रहता है मुझे
मेरी तक़दीर में लिक्खा है क्या, बता मुझको


क्यूं लरज़ता है, झिझकता है, सहमता है भला
इश्क़ तुझको जो है मुझसे, तो ये जता मुझको 


बंद  बक्से  में   रखे   ख़त  की  तरह  क्या जीना
कर दे इक बार तो खुल के भी कुछ अता मुझको


- डॉ ( सुश्री ) शरद सिंह

नींद भी आती नहीं है (ग़ज़ल) ... - डॉ शरद सिंह

Neend Bhi Aati Nahin ... Ghazal of Dr (Miss) Sharad Singh

ग़ज़ल

कह दिया हमने हमारा दिल कभी दुखता नहीं है
मुस्कुराने  से   दिलों  का   टूटना   छुपता नहीं है


नींद के खाते में  चढ़ते  जा  रहे हैं  ख़्वाब मेरे,
नींद भी  आती  नहीं है,  कर्ज़ भी चुकता नहीं।




इस कदर बढ़ने लगा है दर्द अब तो ज़िन्दगी में
लाख थामों नब्ज़ लेकिन  दर्द  ये  रुकता नहीं है

इस जमाने के चलन के  साथ  न 
चल  पाए हम
कोशिशें तो की मगर ये सिर कहीं झुकता नहीं है


- डॉ ( सुश्री ) शरद सिंह


05 March, 2019

इन दिनों कुछ सुकूं-सा रहता है .. डॉ शरद सिंह .. ग़ज़ल

 
Ghazal of Dr ( Miss) Sharad Singh

अर्ज़ है -
इन दिनों कुछ सुकूं-सा रहता है
मुझसे मेरा ही दिल ये कहता है
उसकी चाहता के नूर का दरिया
मेरी आंखों से हो के बहता है
- डॉ शरद सिंह

03 March, 2019

जो लहज़ा नर्म हो तो ... डॉ शरद सिंह .. ग़ज़ल

Ghazal of Dr ( Miss) Sharad Singh

ग़ज़ल
जो  लहज़ा   नर्म   हो   तो,
बात सबको भा ही जाती है
नज़ाकत   आ  ही  जाती है,
शराफ़त    आ  ही  जाती है
- डॉ शरद सिंह

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एक शरारत ही तो की है .. डॉ शरद सिंह .. ग़ज़ल

Ghazal of Dr (Miss) Sharad Singh

अर्ज़ है....
क्यूं मुझको यूं आंख दिखाई
एक  शरारत  ही  तो  की  है
ऐसी   कौन   क़यामत  ढाई
एक  शरारत  ही  तो  की  है
- डॉ शरद सिंह

#शरदसिंह #SharadSingh #Shayari #Ghazal

हसरतों को नया लिबास मिला... डॉ शरद सिंह .. ग़ज़ल

Ghazal of Dr (Miss) Sharad Singh

ग़ज़ल
हसरतों   को  नया   लिबास मिला
आज इक शख़्स ऐसा खास मिला
उसके मिलने से कुछ  हुआ ऐसा
दुश्मनों को भी इक *क़यास मिला
- डॉ शरद सिंह

*अटकल, अनुमान, कल्पना

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07 February, 2019

इश्क़ की चादर - डॉ शरद सिंह ... ग़ज़ल

Ishq ki chadar.. Ghazal of Dr (Miss) Sharad Singh

इश्क़ की चादर ओढ़ जो बैठी
शीत, धूप से क्या उसको
एक अरूप बसा जो मन में
और रूप से क्या उसको
- डॉ शरद सिंह

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04 February, 2019

जुनूने इश्क़ में क्या क्या दिखाई देता है - डॉ शरद सिंह

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जुनूने इश्क़ में क्या क्या दिखाई देता है
हर एक झूठ भी सच्चा दिखाई देता है
भले ही लोग कहें दिल है जिस्म के भीतर
हमें तो हरसूं धड़कता दिखाई देता है
- डॉ शरद सिंह

18 January, 2019

मुहब्बत में शरारत का मज़ा ... - डॉ. शरद सिंह

Mohabbat Me Shararat Ka... Ghazal of Dr (Miss) Sharad Singh
मुहब्बत में  शरारत का  मज़ा   कुछ और होता है
कहा इक ने   तो  दूजे ने   सुना  कुछ और होता है
यही है तो  अलग अंदाज़ा अपने इश्क़ का, बेशक़
कि दुनिया और कुछ समझे, हुआ कुछ और होता है
- डॉ. शरद सिंह

शॉल, कोट, स्वेटर और जाड़े की रात ... - डॉ. शरद सिंह

Shawl, Coat, Sweater ... Ghazal By Dr (Miss) Sharad Singh

 शॉल, कोट, स्वेटर और जाड़े की रात
दूध चाय, शक्कर और जाड़े की रात
याद बहुत आता है ट्रेन के सफ़र में
घर का वो बिस्तर और जाड़े की रात
- डॉ शरद सिंह

उसे दी थी सदा ...- डॉ. शरद सिंह

Use Di Thi Sadaa ... Ghazal by Dr (Miss) Sharad Singh

उसे दी थी सदा पर वो कभी मुड़कर नहीं आया
अंधेरा छा गया हो, साथ   फिर  देता नहीं साया
हमारा ही जुनूं था,  हम   पुकारे  ही  गए उसको
वो बादल था कहीं बरसा,यहांपर फिर नहीं छाया
- डॉ शरद सिंह

04 December, 2018

29 October, 2018

श्रद्धा का एक दीप जलने दो - डॉ शरद सिंह

Dr (Miss) Sharad Singh in Prayer
मन में विनीत भाव पलने दो
श्रद्धा का एक दीप  जलने दो


पुलकित है नदी अगर प्रेम से
लहरों को जोर तो उछलने दो


धरती और आसमान  एक  हैं
शाम ढले क्षितिज पिघलने दो


जिनके  हैं  क़दम  डगमगाये
एक बार उनको सम्हलने दो 


‘शरद’ रात शीतल है भोर तक
गर्मी  की  चर्चाएं  चलने दो


- डॉ शरद सिंह

28 September, 2018

चाहत का हरा पत्ता - डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr Sharad Singh
आज मैंने
सूरज को रखा
अपनी हथेली पर
हथेली जली नहीं
जानते हो क्यों?

कल शाम ही तो
रखा था तुमने
अपनी चाहत का हरा पत्ता
मेरी हथेली पर
एक स्पर्श के रूप में।
- डॉ शरद सिंह

 
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इक उम्र से तनहा हूं - डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr Sharad Singh

इक उम्र से तनहा हूं
ये दिल ने कहा मुझसे
मैंने भी कहा उससे,
अब झूठ नहीं बोलो
तनहाई तो साथी है।
- डॉ शरद सिंह