Sharad Singh
मित्रों का स्वागत है - डॉ. (सुश्री) शरद सिंह
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लेखिका शरद सिंह का व्यक्तित्व एवं कृतित्व
डॉ. शरद सिंह सम्मानित
मेरी कुछ ग़ज़लें
वरिष्ठ नागरिकों पर कविताएं
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17 June, 2026
वो पर तौल रहा है | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | शायरी
वो पर तौल रहा है आकाश में उड़ने के लिए।
किसी और, किसी और, किसी और से जुड़ने के लिए।
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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16 June, 2026
कविता | वे बूझ लेते हैं | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
कविता
वे बूझ लेते हैं
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
शब्द टूटते हैं
छूटते हैं
रूठते हैं
फिर मान जाते हैं,
क्योंकि
वे बूझ लेते हैं
प्रेम को
बड़े प्रेम से।
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कविता | वे बूझ लेते हैं | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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13 June, 2026
जरूरी तो नहीं - डॉ सुश्री शरद सिंह | शायरी
हमख़्याली भी तो इक
शय है इसी दुनिया की,
हो मुहब्बत ही फ़क़त
काम ज़रूरी तो नहीं।
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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10 June, 2026
जीना मुश्किल - डॉ (सुश्री) शरद सिंह | शायरी
अब तो दिल की तनहाई को हुआ जा रहा जीना मुश्किल।
फटी ज़िन्दगी के टुकड़ों को रेशा- रेशा सीना मुश्किल।
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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02 June, 2026
ज़रूरी तो नहीं | डॉ सुश्री शरद सिंह | शायरी
हरेक रिश्ते का हो नाम ज़रूरी तो नहीं।
हो मुहब्बत ही फ़क़त काम,ज़रूरी तो नहीं।
अश्क़ लबरेज़ पियाला है मेरे हाथों में
हो शराबों से भरा जाम,ज़रूरी तो नहीं।
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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29 May, 2026
जो नहीं मिला उसे भूल जा | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | शायरी
जो चला गया उसे याद रख
जो बचा हुआ उसे साथ रख
जो नहीं मिला उसे भूल जा
जो मिला हुआ उसे पास रख
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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27 May, 2026
बात औक़ात की जो करते हैं | डॉ सुश्री शरद सिंह | शायरी
बात औक़ात की जो करते हैं
आईना देखने से डरते हैं
जिनकी तासीर झूठ वाली है
सच का तमगा लगा गुज़रते हैं
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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