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04 April, 2019

नींद भी आती नहीं है (ग़ज़ल) ... - डॉ शरद सिंह

Neend Bhi Aati Nahin ... Ghazal of Dr (Miss) Sharad Singh

ग़ज़ल

कह दिया हमने हमारा दिल कभी दुखता नहीं है
मुस्कुराने  से   दिलों  का   टूटना   छुपता नहीं है


नींद के खाते में  चढ़ते  जा  रहे हैं  ख़्वाब मेरे,
नींद भी  आती  नहीं है,  कर्ज़ भी चुकता नहीं।




इस कदर बढ़ने लगा है दर्द अब तो ज़िन्दगी में
लाख थामों नब्ज़ लेकिन  दर्द  ये  रुकता नहीं है

इस जमाने के चलन के  साथ  न 
चल  पाए हम
कोशिशें तो की मगर ये सिर कहीं झुकता नहीं है


- डॉ ( सुश्री ) शरद सिंह


17 March, 2018

मुझे नहीं .. डॉ शरद सिंह



Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh
मुझे नहीं
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रात अपनी मरमरी आवाज़ में
कुछ कहती है
एक नाम लेती रहती है
नाम?
श्श..श्श..श्श...

रात को छूट है
मुझे नहीं
नाम तुम्हारा लेने की...
- डॉ शरद सिंह

17 February, 2018

रात एक प्रतीक्षा ... डॉ शरद सिंह

Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh
रात एक प्रतीक्षा
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किसी सूने स्टेशन के
प्लेटफार्म में बैठे हुए
प्रतीक्षा करना
विलम्ब से चल रही ट्रेन का
या फिर जाड़े की लम्बी रात में
स्वेटर के फंदों-सा
यादों को बुनना
और दे लेना खुद को तसल्ली
कि रात एक प्रतीक्षा ही तो है
नींद से जागने वाली सुबह की
और ट्रेन लेट ही सही, पर आएगी ही!
रूठना भूल कर लौटे हुए प्रिय की तरह ...

- डॉ शरद सिंह

15 February, 2018

उसकी यादों के मकां में ... डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh
उसकी  यादों के  मकां में  है   बसेरा अब तो
कुछ तो ऐसा हो कि हो जाए वो मेरा अब तो
- डॉ शरद सिंह


30 January, 2018

कठिन लगता है ... डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh

किसी को छोड़ कर आना
किसी से भी न जुड़ पाना
कठिन लगता है अकसर
इस तरह का दौर सह पाना
- डॉ शरद सिंह


25 January, 2018

वज़ह बताना मुश्क़िल है ...... डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh
चार क़िताबें पढ़ कर दुनिया को पढ़ पाना मुश्क़िल है।
हर अनजाने को आगे बढ़, गले लगाना मुश्क़िल है।
सबको रुतबे से मतलब है, मतलब है पोजीशन से
ऐसे लोगों से, या रब्बा! साथ निभाना मुश्क़िल है।
शाम ढली तो मेरी आंखों से आंसू की धार बही
अच्छा है, कोई न पूछे, वज़ह बताना
मुश्क़िल है।
- डॉ. शरद सिंह
(‘मेरे ग़ज़ल संग्रह ‘‘पतझड़ में भीग रही लड़की’’ से)

22 January, 2018

वसंत एक फूल ... डॉ शरद सिंह

Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh
वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं !
Happy Vasant Panchami !!!

वसंत एक फूल
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गुज़रते वसंतों से
एक वसंत चुन कर
टांक लिया है मैंने
यादों के लहराते
बालों में फूल की तरह
अब हर वसंत में
खिल उठता है
वही फूल
*प्लेटोनिक प्रेम की तरह।
- डॉ. शरद सिंह


21 January, 2018

ज़िन्दगी उसी समय... डॉ शरद सिंह

Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh
ज़िन्दगी उसी समय...
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ख़यालों के प्याले से
यादों की
कुछ मीठी चुस्कियां
ठीक वैसे ही
जैसे कोई देखे मुड़ कर देखे
और करे महसूस
किसी के पदचाप
किसी की उपस्थिति
किसी का अपनापन
और साथ चलने की ललक
ज़िन्दगी उसी समय
भर उठती है गर्मजोशी से
अचानक ... अनायास ...।
- डॉ. शरद सिंह

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20 December, 2017

उड़ना चाहती हूं ... डॉ शरद सिंह

Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh
उड़ना चाहती हूं 
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उड़ना चाहती हूं 
पंछी की तरह 
ख़्वाबों के पंख लगा कर 
उन्मुक्त आकाश में, 
लाना चाहती हूं 
ऐसी धूप 
ऐसी हवा 
ऐसी बारिश 
ऐसा चांद 
ऐसे तारे 
ऐसा सूरज 
जो बदल दे क़िस्मत 
सिसकती औरतों की 
और वे भी भरे परवाज़ 
खुले आकाश में 
खुशियां बन कर।
- डॉ शरद सिंह
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