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25 July, 2020

रात के स्याह लिफ़ाफ़े में... (शायरी) - डॉ शरद सिंह


रात के स्याह लिफ़ाफ़े में सितारे रख कर
दे गई  शाम  मुझे  ख़्वाब सुहाने रख कर
- डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh
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02 May, 2020

शाम ... - डॉ शरद सिंह


शाम कुछ चैन से
गुज़र जाती
जो तेरी याद
गर नहीं आती...
- डॉ शरद सिंह

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27 December, 2019

आस्तीनों में छिपे खंज़र ... ग़ज़ल... डॉ शरद सिंह


आस्तीनों में छिपे खंज़र  नहीं देखा किसी ने
साथ देखा और समझा आशना मेरा सभी ने


- डॉ शरद सिंह

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19 December, 2019

बहानों के बादल में ... ग़ज़ल... डॉ शरद सिंह


बहानों के बादल में छुपता रहा वो
है बारिश का सूरज, मुझे पता न था
- डॉ शरद सिंह

21 August, 2019

चाय का गिलास और ... - डाॅ शरद सिंह

Cheers by A Glass of Chai  - Dr (Miss) Sharad Singh
चाय का गिलास और मुट्ठी भर चिंतन
खुद ही आ जाती है लेखन में थिरकन
- डाॅ शरद सिंह

18 April, 2019

एक आवाज़ मेरे कानों से ... (नज़्म) - डॉ शरद सिंह

Ek Aawaz ... Nazm of Dr (Miss) Sharad Singh

नज़्म
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एक आवाज़ मेरे कानों से
आ के बेसाख़्ता लिपटती है
कोई आता हुआ सा लगता है
एक अंगार खुद सुलगता है
फिर उदासी की बर्फ़ गलती है
और धड़कन भी फिर फिसलती है ....
- डॉ शरद सिंह

04 April, 2019

नींद भी आती नहीं है (ग़ज़ल) ... - डॉ शरद सिंह

Neend Bhi Aati Nahin ... Ghazal of Dr (Miss) Sharad Singh

ग़ज़ल

कह दिया हमने हमारा दिल कभी दुखता नहीं है
मुस्कुराने  से   दिलों  का   टूटना   छुपता नहीं है


नींद के खाते में  चढ़ते  जा  रहे हैं  ख़्वाब मेरे,
नींद भी  आती  नहीं है,  कर्ज़ भी चुकता नहीं।




इस कदर बढ़ने लगा है दर्द अब तो ज़िन्दगी में
लाख थामों नब्ज़ लेकिन  दर्द  ये  रुकता नहीं है

इस जमाने के चलन के  साथ  न 
चल  पाए हम
कोशिशें तो की मगर ये सिर कहीं झुकता नहीं है


- डॉ ( सुश्री ) शरद सिंह


04 December, 2018

28 September, 2018

चाहत का हरा पत्ता - डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr Sharad Singh
आज मैंने
सूरज को रखा
अपनी हथेली पर
हथेली जली नहीं
जानते हो क्यों?

कल शाम ही तो
रखा था तुमने
अपनी चाहत का हरा पत्ता
मेरी हथेली पर
एक स्पर्श के रूप में।
- डॉ शरद सिंह

 
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इक उम्र से तनहा हूं - डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr Sharad Singh

इक उम्र से तनहा हूं
ये दिल ने कहा मुझसे
मैंने भी कहा उससे,
अब झूठ नहीं बोलो
तनहाई तो साथी है।
- डॉ शरद सिंह 


दिल के इक शोर ने - डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr Sharad Singh
रात
ख़ामोशी के आगोश में
सो जाती पर
दिल के इक शोर ने
सोने न दिया।
- डॉ शरद सिंह



12 September, 2018

ज़िन्दगी चढ़ाव है, उतार है - डॉ. शरद सिंह

Shayari of Dr Sharad Singh
ज़िन्दगी  चढ़ाव है,   उतार है
रंज़िश के बीच छुपा  प्यार है
मंदिर की सीढ़ियां सिखाती हैं
मिथ्या  हर जीत और  हार है
- डॉ. शरद सिंह


अपने शहर से दूर - डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr Sharad Singh
अपने शहर से दूर
गुज़ारे जो चंद रोज़
लगता है मुद्दतों से
घर ही नहीं गए हैं
- डॉ शरद सिंह

31 August, 2018

सोचता होगा ...... डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr Sharad Singh

              सोचता होगा
(मेरे ग़ज़ल संग्रह ‘परझर में भीग रही लड़की’ से यह मेरी ग़ज़ल) 
                       - डॉ शरद सिंह

सोचता होगा, रखे वह उंगलियों को भाल पर।
छोड़ आए हैं  संदेशा,  काढ़ कर  रूमाल पर।

वह परिधि में  क़ैद अपनी और हम भी क़ैद हैं
व्यर्थ है चर्चा, चहकते  पंछियों  के  हाल पर।

याद की  सीपी उठा कर  आ गई है ज़िन्दगी
तैरती हैं  डोंगियां,  अब झिलमिलाते  ताल पर।

चंद पन्नों की तरह जब कर दिया नत्थी समय ने
क्यों करें महसूस,  सूखी पत्तियों-सा  डाल पर।

दोष मत देना  कभी भी  लड़खड़ाते  भाग्य को
टूटती है अश्व की लय  भी  उखड़ती  नाल पर।

जा चुकी है आयु गुड़िया और  गुड्डा खेलने की
लिख रही हैं   ढेर चिन्ताएं, सफ़ेदी  बाल पर।

क्यों  अंधेरे की निराशा  ओढ़ कर बैठें ‘शरद’?
फिर  उजले  की लकीरें, खींच  डालें भाल पर।

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https://drsharadsingh.blogspot.com/2017/03/patjhar-me-bheeg-rahi-ladki-ghazal-book.html

24 August, 2018

प्यार की सौगंध भी क्या चीज़ है.... डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr Sharad Singh

बांह का तकिया लगा कर सिर टिकाए
हम  विचारों  के   नगर में   घूम आए
प्यार  की   सौगंध    भी क्या चीज़ है
हो भले झूठी, मगर  फिर भी  लुभाए
- डॉ शरद सिंह

(मेरे ग़ज़ल संग्रह ‘पतझर में भीग रही लड़की’ से)

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23 August, 2018

दग़ा कोई करे ... डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh

दग़ा  कोई   करे  तो  ग़म  नहीं  है
वफ़ा के नाम से लगता है अब डर
- डॉ शरद सिंह

03 August, 2018

बेकपैक यादों का - डॉ शरद सिंह .... ग़ज़ल

Shayari of Dr Sharad Singh

ले कर  बस,  बेकपैक  यादों का
छोड़  दें   भरोसा   हर  वादों का
निकल पड़ें फिर यूं ही, बस यूं ही
कर लें कुछ   दिल  के  इरादों का
- डॉ शरद सिंह

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01 August, 2018

जब निग़ाहें बात करती हैं ... डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh

कई खामोशियां लफ़्जों के बदले काम करती हैं
लबों का काम ही क्या जब निग़ाहें बात करती हैं
- डॉ शरद सिंह

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28 July, 2018

शमा बन कर जला जब दिल ... डॉ शरद सिंह ... ग़ज़ल

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh
शमा बन कर जला जब दिल
उजाला  तब   हुआ   हासिल
अंधेरों   से  ये  अब   कह दो
वो   न  बन  पाएंगे   क़ातिल
- डॉ शरद सिंह

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27 March, 2018

मुझे तनहाइयां प्यारी ... - डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh

 मुझे तनहाइयां प्यारी
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मुझे तनहाइयां प्यारी
उसे रुसवाइयां प्यारी
यक़ीं मुझ पर करेगा क्या
उसे *अय्यारियां प्यारी
- डॉ शरद सिंह


*अय्यारियां=जासूसी

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