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29 October, 2018

श्रद्धा का एक दीप जलने दो - डॉ शरद सिंह

Dr (Miss) Sharad Singh in Prayer
मन में विनीत भाव पलने दो
श्रद्धा का एक दीप  जलने दो


पुलकित है नदी अगर प्रेम से
लहरों को जोर तो उछलने दो


धरती और आसमान  एक  हैं
शाम ढले क्षितिज पिघलने दो


जिनके  हैं  क़दम  डगमगाये
एक बार उनको सम्हलने दो 


‘शरद’ रात शीतल है भोर तक
गर्मी  की  चर्चाएं  चलने दो


- डॉ शरद सिंह