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13 December, 2024

कविता | गर्मजोशी | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

मैंने पूछा धूप से
इन दिनों
इतनी ठंडी क्यों हो तुम?
बिना एक पल गंवाए
धूप ने कहा-
मित्रों में भी तो
गर्मजोशी नहीं बची।
    - डॉ (सुश्री) शरद सिंह 

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03 February, 2024

कविता | प्रतीक्षा | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

प्रतीक्षा
 - डॉ (सुश्री) शरद सिंह

धूप का पीछा करती
मैं जा पहुंची
उस दीवार तक
जिस पर चढ़ कर
धूप उतर गई उस पार 
और मैं खड़ी रह गई
इस पार
अगले दिन की प्रतीक्षा में।
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कविता | प्रतीक्षा | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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25 January, 2024

कविता | एक डिग्री | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

एक डिग्री 
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धूप का स्वेटर 
बुन कर
पहना दिया है
पूस के दिन को,
उम्मीद है
बढ़ जाए
रात का पारा
एक डिग्री ।

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03 January, 2024

शायरी | सर्द कोहरा | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

धूप निकली, न चांदनी निकली
सर्द   कोहरा  बहुत   घनेरा   है
चल के मीलों सदा लगा मुझको
दूर    मुझसे    मेरा    बसेरा  है
 - डॉ (सुश्री) शरद सिंह

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19 December, 2023

शायरी | बर्फ़ | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

धूप की कतरनें भी ठंडी थीं
रात भी बर्फ़ बन के गुज़रेगी
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

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09 April, 2022

मुक्तक | धूप को धूप जो नहीं लगती | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

मुक्तक
पी के पानी भी,प्यास है जगती।
छांह भी आजकल मिले तपती।
क्यों दया  आएगी भला उसको
धूप  को  धूप  जो  नहीं  लगती।
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

24 December, 2021

शीत | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | कविता

शीत
धूप का पहाड़ा
कठिन हो चला है
शीत की गिनती
उंगलियों पर है
ठिठुरन बन के...
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह 

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10 February, 2019

वसंत - डॉ शरद सिंह

Poetry on Vasant by Dr Sharad Singh

वसंत
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एक एहसास है वसंत
धूप के गरमाने का
मन के भरमाने का
मौसम के बदलने का
रंगों में ढलने का
सारे दुख भूल कर
प्रेम-डगर चलने का...

- डॉ शरद सिंह

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08 August, 2017

वह प्रेम है ... डॉ शरद सिंह

Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh

वह प्रेम है
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वह
इतना हल्का भी नहीं
कि उड़ जाए हवा में
इतना भारी भी नहीं
कि पैंठ जाए तलछठ में
वह
भटकता नहीं
चाहे लोग उसे भटकाव ही मानें
वह जलता नहीं
चाहे उसे आग का दरिया ही मानें
वह
एक अहसास है
कोमल, पवित्र
मानो धूप और चांदनी

वह
प्रेम है
मत उछालो उसे फ़िकरे-सा
यहां-वहां
प्रेम की अवमानना से बड़ा अपराध
कोई नहीं।

- डॉ शरद सिंह

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