Showing posts with label इन दिनों. Show all posts
Showing posts with label इन दिनों. Show all posts

28 June, 2021

इन दिनों | कविता | डॉ शरद सिंह

इन दिनों
       - डॉ शरद सिंह

मेज पर रखी
अपनी हथेली पर
देखती हूं
ठहरी हुई धूप
गोल, चमकीले धब्बे-सी

देर तक देखती हूं तो
चौंधिया जाती हैं आंखें
अकुलाकर 
मूंदती हूं आंखें
दिखते हैं
काले-काले धब्बे

बदल जाता है धूप का चरित्र
आंखों में समाते ही

सोचती हूं तभी-
यानी इंसान 
धूप से भी तेज है
चरित्र बदलने में
बदल जाता है वह तो
पलक झपकते ही

धूप को पढ़ती हुई
जान रही हूं 
अपनी ज़िम्मेदारियों को
ज़रूरतों को
और
इंसान के प्रकारों को
इन दिनों।
   ---------

#शरदसिंह #डॉशरदसिंह #डॉसुश्रीशरदसिंह
#SharadSingh #Poetry #poetrylovers
#World_Of_Emotions_By_Sharad_Singh #HindiPoetry 

10 July, 2018

दिल हुआ रंगरेज देखो, इन दिनों - डॉ शरद सिंह


Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh
दिल हुआ रंगरेज देखो, इन दिनों
रंग रहा है इश्क़ की चादर यहां
छत नहीं, दीवार न हो, न हो दर भी
है वहीं घर, ढाई हों आखर जहां
- डॉ शरद सिंह


#SharadSingh #Shayari #Ghazal
#World_Of_Emotions_By_Sharad_Singh #दिल #रंगरेज #इश्क़ #चादर #छत #दीवार #ढाईआखर




25 July, 2017

इन दिनों .... डॉ. शरद सिंह

Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh

इन दिनों
-----------

सूरज को बर्फ होते
चांद को जलते
पंछियों को तैरते
मछलियों को उड़ते
मैंने देखा है
उसे
इन दिनों बदलते