01 December, 2020

इक अलाव जलने दो | कविता | डाॅ शरद सिंह

Jade Ki Raat - Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh

इक अलाव जलने दो

- डाॅ शरद सिंह

जाड़े की रात 

ठिठुराते

बड़े पहर

चलने दो, 

जीवन में 

गरमाहट लाने को

यादों का 

इक अलाव जलने दो।

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12 comments:

  1. जो हमारे होने की गवाही देता है ... यादों का अलाव । अति सुन्दर ।

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    1. हार्दिक धन्यवाद अमृता तन्मय जी 🙏

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  2. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 04-12-2020) को "उषा की लाली" (चर्चा अंक- 3905) पर होगी। आप भी सादर आमंत्रित है।
    …
    "मीना भारद्वाज"

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    1. प्रिय मीना जी,
      आपने मेरी रचना को भी चर्चा में सम्मिलित किया, यह मेरे लिए अत्यंत प्रसन्नता का विषय है।
      बहुत बहुत धन्यवाद 🙏🌹🙏

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    1. बहुत शुक्रिया ओंकार जी 🙏

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    1. हार्दिक धन्यवाद शांतनु सान्याल जी 🙏

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  5. गर्माहट लानी है तो इक अलाव जलने दो
    बहुत खूब...।

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  6. बहुत बहुत धन्यवाद ज्योति जी 🙏

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  7. बहुत बहुत धन्यवाद सुधा जी 🙏

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  8. वाह!बेहतरीन आदरणीय दी...यादों का एक अलाव।
    सादर

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