19 December, 2019

बहानों के बादल में ... ग़ज़ल... डॉ शरद सिंह


बहानों के बादल में छुपता रहा वो
है बारिश का सूरज, मुझे पता न था
- डॉ शरद सिंह

4 comments:

  1. जी नमस्ते,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार(20 -12 -2019) को "कैसे जान बचाऊँ मैं"(चर्चा अंक-3555)  पर भी होगी।

    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।

    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।

    आप भी सादर आमंत्रित है 

    ….
    अनीता लागुरी 'अनु '

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    1. अनीता लागुरी'अनु' जी, आपने 20.12.2019 के चर्चा अंक-3555 में मेरी पोस्ट को शामिल किया था जिसके लिए मैं आपकी हृदय से आभारी हूं। इन्दौर लिटरेचर फेस्टिवल में स्पीकर के रूप में व्यस्तता के कारण मैं चर्चा अंक पर विलम्ब से पहुंच पाई। आशा है अन्यथा नहीं लेंगी। पुनः आभार मेरी पोस्ट को सुधी पाठकों तक पहुंचाने के लिए!!

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    1. हार्दिक धन्यवाद कुसुम कोठारी जी !!!

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