25 August, 2022

ग़ज़ल | उसकी यादें | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

ग़ज़ल 
उसकी यादें
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

उसकी यादें दरवाज़े पर दस्तक बन टकराती हैं।
दिल की चौखट रो पड़ती है, आंखें भर-भर आती हैं।

ज़िन्दा रहना कमिट किया है, सांसें तो लेनी होंगी
वरना अब तो इच्छाएं भी, मुझसे ही कतराती हैं।

मुस्कानों का मास्क लगा कर, दर्द छिपाना बहुत कठिन
आंसू की बूंदें तो अकसर आंखों में उतराती हैं।

कभी-कभी ऐसा लगता है, मौन साध लें दुनिया से
अपनेपन की मृगतृष्णा भी राहों में भटकाती है।

जब तक हिम्मत साथ दे रही, लोहा लेंगे क़िस्मत से
देखें क़िस्मत हमको कितने, कैसे खेल खिलाती है।

वर्षा के बिन 'शरद' आएगी, कब तक आखिर ऋतुओं में
बदल रहे मौसम के क्रम अब, बात यही उलझाती है।
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22 August, 2022

मुक्तक | दर्द हमेशा सच्चा है | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

मुक्तक |  दर्द हमेशा सच्चा है
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

कुछ भी ना होने से कुछ दर्दों का होना अच्छा है।
प्यार ग़लत हो सकता है पर दर्द हमेशा सच्चा है।

दिन भर की तनहाई लेकर, रात पहाड़े पढ़ती है
दिल को क्या समझाएं, दिल तो इक पागल-सा बच्चा है।
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20 August, 2022

आज फिर | ग़ज़ल | शायरी | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

एक सांझ ढल गई आज फिर
एक आस छल गई आज फिर
सूर्य फिर उतर गया पहाड़ से
एक रात मिल गई आज फिर
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

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14 August, 2022

गीत | हर घर तिरंगा | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

प्रस्तुत है आज 14.08.2022 को युवाप्रवर्तक में प्रकाशित मेरा यह गीत....

गीत 
हर घर तिरंगा

- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

लहराए तिरंगा हर घर में
फहराए तिरंगा हर घर में....

रहे हरित से हरियाली
श्वेत रंग से खुशियाली
जोश भरे केसरिया रंग
नील चक्र भी भरे उमंग

मुस्काए तिरंगा हर घर में
लहराए तिरंगा हर घर में
फहराए तिरंगा हर घर में....

यही हमारा है अभिमान
यही   हमारा है  सम्मान
इसके लिए समर्पित हैं
अपने   तन, मन  प्रान

इतराए तिरंगा हर घर में
लहराए तिरंगा हर घर में
फहराए तिरंगा हर घर में....

हमको इस पर है नाज़ सदा
इसको  छूऐ न   कभी मृदा
ये है स्वतंत्रता की  पहचान
ये  सबसे  सुंदर  और  ज़ुदा

बस जाए तिरंगा हर घर में
लहराए तिरंगा हर घर में
फहराए तिरंगा हर घर में....
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हार्दिक धन्यवाद #yuvapravartak 🙏
इस गीत को इन लिंक्स पर भी पढ़ सकते हैंः

And..

21 July, 2022

ग़ज़ल | हकीक़त से हमने बुनी है कहानी | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

मित्रो, ये है मेरी ग़ज़ल का वह टुकड़ा जो मैंने भारत भवन में अपने वक्तव्य के दौरान सुनाया था...
पढ़ी है कहानी,  सुनी है कहानी 
इसी  ज़िंदगी  से  चुनी है कहानी
नहीं खेल लफ़्ज़ों का, है आईना ये
हकीक़त से हमने बुनी है कहानी
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

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11 July, 2022

ग़ज़ल | अश्क़ अपने | डॉ (सुश्री) शरदसिंह

ग़ज़ल
अश्क़ अपने
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

क्या बताएं, किस तरह, कैसे जिए हैं?
टिमटिमाती  लौ  लिए  बुझते दिए हैं।

अब न रोएंगे, किया वादा है  ख़ुद से
अश्क़ अपने बेदख़ल सब कर दिए हैं।

वक़्त ने जो रंग बदला,  लोग बदले
साथ थे जो , आज  वो  दूजे ठिए हैं।

हम शिक़ायत क्या करें हालात से
लिख दिए हिस्से  हमारे  मर्सिए हैं।

अब फ़क़ीरी है 'शरद' की ज़िंदगी में
हो भला उसका, दग़ा जिसने किए हैं।
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02 July, 2022

ग़ज़ल | प्यार की बातें करो | डाॅ (सुश्री) शरद सिंह

 


Ghazal - Nafraton Ke Daur Me .. Dr (Ms) Sharad Singh


ग़ज़ल

- डाॅ (सुश्री) शरद सिंह

नफ़रतों के  दौर में  मनुहार की बातें करो।

एकता की, मित्रता की, प्यार की बातें करो।

न मिले मौक़ा यहां  फ़िरक़ापरस्ती के लिए

आपसी सद्भाव की, सत्कार की बातें करो।

हम अमन औ शांति के पथ पर हमेशा ही चलें

विश्व में आतंकियों के हार की बातें करो।

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