30 January, 2018
26 January, 2018
25 January, 2018
वज़ह बताना मुश्क़िल है ...... डॉ शरद सिंह
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| Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh |
चार क़िताबें पढ़ कर दुनिया को पढ़ पाना मुश्क़िल है।
हर अनजाने को आगे बढ़, गले लगाना मुश्क़िल है।
सबको रुतबे से मतलब है, मतलब है पोजीशन से
ऐसे लोगों से, या रब्बा! साथ निभाना मुश्क़िल है।
शाम ढली तो मेरी आंखों से आंसू की धार बही
अच्छा है, कोई न पूछे, वज़ह बताना मुश्क़िल है।
- डॉ. शरद सिंह
हर अनजाने को आगे बढ़, गले लगाना मुश्क़िल है।
सबको रुतबे से मतलब है, मतलब है पोजीशन से
ऐसे लोगों से, या रब्बा! साथ निभाना मुश्क़िल है।
शाम ढली तो मेरी आंखों से आंसू की धार बही
अच्छा है, कोई न पूछे, वज़ह बताना मुश्क़िल है।
- डॉ. शरद सिंह
22 January, 2018
वसंत एक फूल ... डॉ शरद सिंह
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| Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh |
Happy Vasant Panchami !!!
वसंत एक फूल
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गुज़रते वसंतों से
एक वसंत चुन कर
टांक लिया है मैंने
यादों के लहराते
बालों में फूल की तरह
अब हर वसंत में
खिल उठता है
वही फूल
*प्लेटोनिक प्रेम की तरह।
- डॉ. शरद सिंह
(*प्लेटोनिक प्रेम = अशरीरी प्रेम, वासनारहित प्रेम)
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#याद #शरदसिंह #वसंत #टांक_लिया #बालों_में #प्लेटोनिक_प्रेम #लहराते #बालोंमें #वसंतों
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21 January, 2018
ज़िन्दगी उसी समय... डॉ शरद सिंह
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| Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh |
ज़िन्दगी उसी समय...
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ख़यालों के प्याले से
यादों की
कुछ मीठी चुस्कियां
ठीक वैसे ही
जैसे कोई देखे मुड़ कर देखे
और करे महसूस
किसी के पदचाप
किसी की उपस्थिति
किसी का अपनापन
और साथ चलने की ललक
ज़िन्दगी उसी समय
भर उठती है गर्मजोशी से
अचानक ... अनायास ...।
- डॉ. शरद सिंह
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19 January, 2018
एक शाम... बस, यूं ही ... डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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| Dr (Miss) Sharad Singh, Author |
एक डोसा, एक पिज्जा, एक बर्गर
आपस में शेयरिंग
खाने की
बातों की
और
ढेर सारे अपनेपन की
कभी-कभी,
होना ही चाहिए
बस, यूं ही ...
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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| Dr (Miss) Sharad Singh, Author and Poetess Dr Varsha Singh |
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| Dr (Miss) Sharad Singh, Author and Poetess Dr Varsha Singh |
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| Dr (Miss) Sharad Singh, Author |
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| Dr (Miss) Sharad Singh, Author |
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| Dr (Miss) Sharad Singh, Author |
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| Dr (Miss) Sharad Singh, Author |
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| Dr (Miss) Sharad Singh, Author |
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| Dr (Miss) Sharad Singh, Author |
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| Dr (Miss) Sharad Singh, Author |
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| Dr (Miss) Sharad Singh, Author |
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| Dr (Miss) Sharad Singh, Author |
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| Dr (Miss) Sharad Singh, Author |
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| Dr (Miss) Varsha Singh,Poetess |
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| Dr (Miss) Sharad Singh, Author |
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| Dr (Miss) Sharad Singh, Author |
08 January, 2018
दे दिये आंसू ... डॉ शरदसिंह
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| Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh |
शख़्स वो, सोचो भला कैसे किसी का हो सका
जो अकेलेपन से लड़ता, जूझता दिन भर रहा
रात आई, इक पहर भी चैन से न सो सका
- डॉ शरदसिंह
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