15 June, 2021

मेरी याद | कविता | डॉ शरद सिंह

मेरी याद
      - डॉ शरद सिंह
तुम मुझे कैसे याद करोगे
पता नहीं
शायद रात से जूझते
दूज के चांद की तरह
या, दिन में 
रेतीली आंधी में फंसे
सूरज की तरह,
जुगनू की तरह
या तितली की तरह,
या शेल्फ में सजी
किसी सजावटी क़िताब की तरह
सजा कर रखोगे
पर पढ़ोगे नहीं,
या फिर मेरी याद को
बेच दोगे किसी कबाड़ी को
रद्दी अख़बार की तरह,
क्या मेरी याद
कोई अर्थ रखेगी
मेरे जाने के बाद
तुम्हारे लिए?
तुमने तो भुला दीं
गिलोटिन से कटी गरदनें
और बोल्शेविक क्रांति भी
गुलामी की त्रासदी
और युद्ध का क़हर भी
फिर कैसे करोगे
मुझे याद
मेरी याद तो रहेगी बहुत छोटी सी
दूब की नोंक पे रखी
ओस की बूंद जैसी
क्या छू सकोगे
मन की उंगली से?
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9 comments:

  1. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार (18-06-2021) को "बहारों के चार पल'" (चर्चा अंक- 4099) पर होगी। चर्चा में आप सादर आमंत्रित हैं।
    धन्यवाद सहित।

    "मीना भारद्वाज"

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    1. मेरी कविता को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए हार्दिक आभार मीना भारद्वाज जी 🙏

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  2. बहुत ही सुंदर सृजन

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  3. दूब की नोंक पे रखी
    ओस की बूंद जैसी
    क्या छू सकोगे
    मन की उंगली से?

    वाह

    बेहतरी पेशकश ।

    सादर

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  4. बहुत ही सुंदर हृदयस्पर्शी सृजन।
    सादर

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  5. मेरी याद तो रहेगी बहुत छोटी सी
    दूब की नोंक पे रखी
    ओस की बूंद जैसी
    क्या छू सकोगे
    मन की उंगली से?

    हृदयस्पर्शी सृजन,आप कैसी है शरद जी

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  6. वाह वाह वाह शरद जी, बहुत खूब ल‍िखा क‍ि---मेरी याद तो रहेगी बहुत छोटी सी
    दूब की नोंक पे रखी
    ओस की बूंद जैसी---वाह

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  7. हृदयस्पर्शी सृजन

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