01 February, 2021

किसानों की बातें | ग़ज़ल | डॉ. (सुश्री) शरद सिंह

Dr (Miss) Sharad Singh

ग़ज़ल

किसानों की बातें

- डॉ. (सुश्री) शरद सिंह


सियासत नहीं हैं, किसानों की बातें।

तिज़ारत  नहीं हैं, किसानों की बातें।


खेती, किसानी नहीं सब के बस की

नफ़ासत नहीं हैं, किसानों की बातें।


पसीना  बहाए,    लहू  को  सुखाए

शरारत  नहीं हैं, किसानों की बातें।


भले ही  अंगूठा  लगा कर  जिए वो

ज़हालत  नहीं हैं, किसानों की बातें।


जो हक़ मांगने को, उठाए वो बांहें

बग़ावत  नहीं हैं, किसानों की बातें।


'शरद' वो नहीं हैं किसी के भी दुश्मन

अदावत नहीं  हैं,  किसानों की बातें।


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भारतीय किसान | Indian Farmer


12 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन  में" आज मंगलवार 02 फरवरी को साझा की गई है.........  "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. दिग्विजय अग्रवाल जी,
      आभारी हूं कि आपने मेरी ग़ज़ल को "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" शामिल किया है। यह मेरे लिए सुखद है। आपको बहुत-बहुत धन्यवाद 🌹🙏🌹
      - डॉ शरद सिंह

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  2. आपने बिलकुल ठीक फ़रमाया शरद जी । बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है आपने जो कि मौजूदा हालात पर सही नज़रिया पेश करती है ।

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    1. मौजूदा हालात अत्यंत व्यथित करने वाले हैं जितेन्द्र जी।
      आपको हार्दिक धन्यवाद 🌹🙏🌹

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  3. यथार्थ पूर्ण सृजन..

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    1. बहुत धन्यवाद जिज्ञासा सिंह जी 🌹🙏🌹

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  4. समसामयिक घटनाचक्र को रेखांकित करती बेहतरीन रचना

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    1. अभिलाषा जी, बहुत-बहुत धन्यवाद 🌹🙏🌹

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  5. पसीना बहाए, लहू को सुखाए

    शरारत नहीं हैं, किसानों की बातें।

    सुंदर ग़ज़ल.......सही कहा आपने किसान बनना काफी मुश्किल है....

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    1. हार्दिक धन्यवाद विकास नैनवाल 'अंजान' जी 🌹🙏🌹

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