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| Dr (Miss) Sharad Singh |
ग़ज़ल
किसानों की बातें
- डॉ. (सुश्री) शरद सिंह
सियासत नहीं हैं, किसानों की बातें।
तिज़ारत नहीं हैं, किसानों की बातें।
खेती, किसानी नहीं सब के बस की
नफ़ासत नहीं हैं, किसानों की बातें।
पसीना बहाए, लहू को सुखाए
शरारत नहीं हैं, किसानों की बातें।
भले ही अंगूठा लगा कर जिए वो
ज़हालत नहीं हैं, किसानों की बातें।
जो हक़ मांगने को, उठाए वो बांहें
बग़ावत नहीं हैं, किसानों की बातें।
'शरद' वो नहीं हैं किसी के भी दुश्मन
अदावत नहीं हैं, किसानों की बातें।
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| भारतीय किसान | Indian Farmer |












