13 January, 2024

शायरी | सो गया | डॉ (सुश्री) शरद सिंह


उसने  किताब  रख ली  सिरहाने में,  सो गया
दिन भर की मजूरी की थकन से ना पढ़ सका
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

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12 January, 2024

शायरी | इश्क़ | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

मज़ा क्या ही रहे जो  इश्क़ गर आसान हो जाए 
मज़ा तो तब है जब ये दिल कहीं क़ुर्बान हो जाए
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

शायरी | इश्क़ | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

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08 January, 2024

शायरी | बेवफ़ा | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

ख़ुशी बेवफ़ा, ज़िन्दगी बावफ़ा 
लिहाज़ा मैंं ख़ुद हूं रहती ख़फ़ा
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

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05 January, 2024

शायरी | नफ़रत में | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

जी   न  पाने  से   अच्छा 
कि  जी   लें   ग़फ़लत में
कुछ   न    हासिल  हुआ 
किसी को कभी नफ़रत में
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

शायरी | नफ़रत में | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

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03 January, 2024

शायरी | सर्द कोहरा | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

धूप निकली, न चांदनी निकली
सर्द   कोहरा  बहुत   घनेरा   है
चल के मीलों सदा लगा मुझको
दूर    मुझसे    मेरा    बसेरा  है
 - डॉ (सुश्री) शरद सिंह

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02 January, 2024

शायरी | ये ज़िंदगी | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

ये ज़िंदगी तो बहुत अजनबी-सी लगती है
कभी भली थी, मगर अब बुरी-सी लगती है
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

शायरी | ये ज़िंदगी | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

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01 January, 2024

शायरी | मसाईल | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

उसके जाने की अफ़्सुर्दगी क्यों मिली
ज़िन्दगी में मसाइल कहीं कम थे क्या?
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
(अफ़्सुर्दगी=अवसाद, depression) 

शायरी | मसाईल | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

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