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03 March, 2024

शायरी | ज़िंदगी | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

किसी क़ीमत मोहब्बत हो सकी न ज़िंदगी से 
लिहाज़ा ज़िंदगी भी अजनबी लगने लगी है। 
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

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01 January, 2024

शायरी | मसाईल | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

उसके जाने की अफ़्सुर्दगी क्यों मिली
ज़िन्दगी में मसाइल कहीं कम थे क्या?
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
(अफ़्सुर्दगी=अवसाद, depression) 

शायरी | मसाईल | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

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12 December, 2023

शायरी | ज़िंदगी | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

ये ज़िंदगी तो बड़ी अजनबी-सी लगती है
कभी भली तो कभी ये बुरी-सी लगती है
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

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26 November, 2023

शायरी | ज़िंदगी | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

कट रहे हैं दिन   सुपारी की तरह
ज़िन्दगी लगती, उधारी की तरह
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

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10 May, 2023

शायरी | ज़िंदगी का सफ़र | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

अर्ज़ है -
ज़िंदगी का सफ़र तो  सिफ़र ही रहा
कुछ न मैंने कहा, कुछ न उसने कहा
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

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02 August, 2020

ज़िन्दगी में दोस्ती से जान आती है - डॉ शरद सिंह

ज़िन्दगी  में  दोस्ती से  जान आती है
और इंसा की  सही पहचान आती है
एक सच्चा दोस्त दुख में साथ देता है
एक सच्ची  दोस्ती  से  शान आती है
- डॉ शरद सिंह 
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24 February, 2018

ज़िंदगी दिखती उदासी आजकल ... डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh


अपने ग़ज़ल संग्रह " पतझड़ में भीग रही लड़की " में प्रकाशित एक ग़ज़ल के कुछ शेर...
 
ज़िंदगी दिखती उदासी आजकल
आस्था लगती धुआं सी आजकल
कंदराएं अब भली लगाने लगीं
हो गया मन आदिवासी आजकल

निर्जला व्रत कह दिया हमने मगर
आत्मा तक है पियासी आजकल
- डॉ शरद सिंह


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