18 January, 2023

शायरी | ग़ज़ल | सीख लिया | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

अर्ज़ है -
दिल बहलाना सीख लिया।
ज़ख़्म छिपाना सीख लिया।
मुस्कानों का पहन मुखौटा
हंसना,  गाना  सीख लिया।
अपने  ही  ख़्वाबों  से  मैंने
अब  कतराना सीख लिया।
लावारिस  बच्चे  जब देखे
ख़ैर  मनाना  सीख  लिया।
'शरद' सहारा है यादों का
यही  बहाना  सीख  लिया।
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

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14 January, 2023

शायरी | दिल हुआ पतंग | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | मकरसंक्रांति

मकरसंक्रांति की हार्दिक शुभकामनाओं सहित #अर्ज़है -

सपनों की  डोर  और  मंझा उम्मीदों, 
चाहत का आसमान,दिल हुआ पंतग।
कुछ तो बदलाव है, मौसम की चाल में
दिखती  हर  चेहरे  पर  ढेर सी उमंग।
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

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11 January, 2023

शायरी | वो क्या समझेगा | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

अर्ज़ है -
शायरी
वो क्या समझेगा दिल को, जज़्बातों को
जिसने दौलत, शोहरत को *तरजीह दिया
जीने  का   तो   हुनर   वही   बतलायेगा
जिसने शाम-ओ-सहर हमेशा ज़हर पिया
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
(*तरजीह = प्राथमिकता)

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03 January, 2023

कविता | नहीं मालूम था | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

कविता 
नहीं मालूम था
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

मुझे नहीं मालूम था
कि धूप 
मेरे हाथ से 
फिसल कर 
शीत में 
बदल जाएगी, 
नहीं तो 
मैं सूरज को 
मुट्ठी में 
भींच कर रखती।
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02 January, 2023

कविता | जीने के लिए - डॉ (सुश्री) शरद सिंह

कविता 
जीने के लिए
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

मालूम है
वह
नहीं मिलेगा
कभी,
लेकिन क्या
सिर्फ़ इतने पर
आकाश के तारे को 
देखना छोड़ देते हैं
लोग?
नहीं न !
कुछ भ्रम ज़रूरी हैं जीने के लिए !!
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01 January, 2023

नये साल में | ग़ज़ल | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

नये साल में
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

पिछले साल करी जो ग़लती उसको ना दोहराएं।
नये साल को अच्छाई से, अच्छा साल बनाएं। 

जो नहीं मिला, सो नहीं मिला, ना सोचें उसको
जो मिला हमें, उसको हम, पूरे दिल से ही अपनाएं।

है एक सुनहरा कल स्वागत में खड़ा हुआ
अपनी मेहनत से आगे बढ़, हम हाथ मिलाएं।

खुद पर हम विश्वास करें औ अच्छे-अच्छे काम करें
मदद करें औरों की, और, औरों को साथ बढ़ाएं।

मुश्क़िल कैसी भी आए, पर, हार नहीं मानेंगे
नये साल में आगे बढ़ कर यह संकल्प उठाएं
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