26 July, 2021

टूटे पत्ते की तरह | कविता | डॉ शरद सिंह

टूटे पत्ते की तरह
        - डॉ शरद सिंह

भीड़ 
अब नहीं लुभाती मुझे,
तुम्हारे न होने का अहसास
होता है हर जगह
सज़ा है मेरे लिए
सामने दीर्घा में
तुम्हें न देख पाना

जब करता कोई
तुम्हारी चर्चा
"दीदी थीं" के संबोधन सहित,
चींख उठती है
मेरी अंतर्आत्मा
चुभने लगती हैं किरचें
शब्दों की,
उतर जाती है
बलात् ओढ़ी गई 
मुस्कुराहट

मन लगाने को
घर से निकले क़दम
जब लौटते हैं घर
किसी आयोजन के बाद
कांपते हैं हाथ
खोलते हुए ताला 
लड़खड़ाते हैं पैर
सूने घर में
क़दम रखते ही,
कोई नहीं जो 
प्रतीक्षारत हो मेरे लिए
कोई नहीं
जो मेरी बातें सुने
पूछे मुझसे पूरा हाल

घर हो 
या आयोजन
एक शून्य 
रहता है चुभता
निरंतर
हर पल, हर कहीं
ढूंढती रहती हैं  
मेरी आंखें
उस शून्य में भी 
तुम्हें ही

संभव नहीं 
तुम्हारा आना, 
बुला लो मुझे
अपने पास
ख़त्म हो यातना का दौर
वरना
भटकता रहेगा
निरुद्देश्य जीवन
एक टूटे पत्ते की तरह
समय की आंधी में
थपेड़े खाता हुआ।
     ---------------–
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#World_Of_Emotions_By_Sharad_Singh #HindiPoetry 

12 comments:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" मंगलवार 27 जुलाई 2021 को साझा की गयी है.............. पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. 'पांच लिंकों का आनंद' में मेरी कविता को स्थान देने के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद एवं आभार यशोदा अग्रवाल जी 🙏

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  2. शरद जी , वेदना से सिसकते मन की व्यथ कथा पढ़कर मानो शब्द मौन हो जाते हैं | यही कहूंगी --
    लाख बहाए आँसू हमने- ना लौटे वो जाने वाले //
    जाने कहाँ बसाई बस्ती , तोड़ निकल गये मन के शिवाले !////
    समय ही दवा है इस दर्द की ! आपको संभलना ही होगा !

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    1. हार्दिक धन्यवाद रेणु जी 🙏
      जीवन के सारे यथार्थ जानते, समझते हुए भी मन को समझा पाना सबसे कठिन होता है...

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  3. किसी अपने का हमेशा के लिए चले जाना इंसान को तोड़ कर रख देता है। उसके न होने की वेदना बहुत रुलाती है। शुभकामनाएं आपको। सादर।

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    1. यही सच है वीरेंद्र सिंह जी ...
      आपको हार्दिक धन्यवाद 🙏

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  4. शरद जी ,आपको अपने आपको संभालना होगा ,जानती हूँ ,सरल नहीं ,अपना ख्याल रखिएगा ।

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    1. हार्दिक धन्यवाद शुभम जी 🙏
      आप सब की आत्मीयता ही अब संबल प्रदान करती हैं...

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  5. भुला नहीं सकते कभी...
    पर याद रखने का तरीक़े में बदलाव ज़रूरी
    दीदी की ग़ज़लों को कभी-कभार प्रकाशित करिए
    सारे पाठकों को भी अच्छा लगेगा
    सादर..

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    1. जी, बहुत धन्यवाद यशोदा जी !
      आपने सही कहा मैं कोशिश करूंगी...

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  6. ओह बेहद मार्मिक चित्रण,नयन हो गये नम

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    1. ओह, क्षमा करें मैं आप सबको व्यथित नहीं करना चाहती हूं 🙏

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