05 March, 2019

इन दिनों कुछ सुकूं-सा रहता है .. डॉ शरद सिंह .. ग़ज़ल

 
Ghazal of Dr ( Miss) Sharad Singh

अर्ज़ है -
इन दिनों कुछ सुकूं-सा रहता है
मुझसे मेरा ही दिल ये कहता है
उसकी चाहता के नूर का दरिया
मेरी आंखों से हो के बहता है
- डॉ शरद सिंह

03 March, 2019

जो लहज़ा नर्म हो तो ... डॉ शरद सिंह .. ग़ज़ल

Ghazal of Dr ( Miss) Sharad Singh

ग़ज़ल
जो  लहज़ा   नर्म   हो   तो,
बात सबको भा ही जाती है
नज़ाकत   आ  ही  जाती है,
शराफ़त    आ  ही  जाती है
- डॉ शरद सिंह

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एक शरारत ही तो की है .. डॉ शरद सिंह .. ग़ज़ल

Ghazal of Dr (Miss) Sharad Singh

अर्ज़ है....
क्यूं मुझको यूं आंख दिखाई
एक  शरारत  ही  तो  की  है
ऐसी   कौन   क़यामत  ढाई
एक  शरारत  ही  तो  की  है
- डॉ शरद सिंह

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हसरतों को नया लिबास मिला... डॉ शरद सिंह .. ग़ज़ल

Ghazal of Dr (Miss) Sharad Singh

ग़ज़ल
हसरतों   को  नया   लिबास मिला
आज इक शख़्स ऐसा खास मिला
उसके मिलने से कुछ  हुआ ऐसा
दुश्मनों को भी इक *क़यास मिला
- डॉ शरद सिंह

*अटकल, अनुमान, कल्पना

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सूखे पेड़ की मानिंद ... डॉ शरद सिंह ... कविता

Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh


सूखे पेड़ की मानिंद
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रह गए जो
एक सूखे पेड़ की मानिंद,
उनकी आंखें
सब्ज़ अश्क़ों को
तरसती ही रहीं ...
            - डॉ शरद सिंह

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जो दिन मुश्क़िल भरे हों तो ... डॉ शरद सिंह .. ग़ज़ल

Ghazal of Dr (Miss) Sharad Singh

अर्ज़ किया है....
जो दिन मुश्क़िल भरे हों तो सभी नज़रें चुराते हैं
ग़मों की आंच से  आंखों के दरिये  सूख जाते हैं
- डॉ शरद सिंह

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