Showing posts with label मैं ग़ज़ल की एक किताब हूं. Show all posts
Showing posts with label मैं ग़ज़ल की एक किताब हूं. Show all posts

01 February, 2023

शायरी | मैं ग़ज़ल की एक किताब हूं | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

मैं ग़ज़ल की एक क़िताब हूं, 
मुझे साथ अपने रखा करो।
मिरी सांस-सांस है शायरी
मुझे तुम अदब से पढ़ा करो।
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
( मेरे गजल संग्रह "पतझड़ में भीग रही लड़की" से )

#शायरी #ग़ज़ल #डॉसुश्रीशरदसिंह
#DrMissSharadSingh #ShayariOfDrMissSharadSingh
#World_Of_Emotions_By_Sharad_Singh #क़िताब #सांस #अदब #पढ़ाकरो

18 May, 2017

मैं ग़ज़ल की एक किताब हूं ... - डॉ शरद सिंह

लम्बी बहर का एक शेर मेरे ग़ज़ल संग्रह ‘‘पतझड़ में भीग रही लड़की’’ से ....
Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh

Few lines (a Sher) from my Ghazal collection (poetry book) "Patajhar men bheeg rahi ladaki" ....