23 November, 2020

जाड़ों की रात में | कविता | डॉ शरद सिंह

जाड़ों की रात में ...
          - डॉ शरद सिंह

जाड़ों की रात में
लिहाफ़ में दुबके
किसी यादों से गरमाए सपने
नहीं चाहते हैं जागना
इसीलिए तो रातें
लम्बी हो जाती हैं 
जाड़ों में।
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4 comments:

  1. कुछ पंक्तियों में काफ़ी कुछ कह गईं आप शरद जी...।सुंदर अभिव्यक्ति..।

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    1. हार्दिक धन्यवाद जिज्ञासा सिंह जी 🙏🌷🙏

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  2. Replies
    1. बहुत बहुत धन्यवाद जितेन्द्र माथुर जी 🙏🌷🙏

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