10 September, 2022

कविता | इन दिनों | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

कविता 
इन दिनों 
 - डॉ (सुश्री) शरद सिंह

बादलों का लिहाफ़ 
ओढ़कर
सोता है चांद
इन दिनों,
घुट रही है चांदनी
 पहर-दर-पहर।    
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#कविता #poetry #हिन्दीकविता 
#डॉसुश्रीशरदसिंह #चांद #चांदनी #बादल #drmssharadsingh 

07 September, 2022

कविता | तुमने तो | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

कविता
तुमने तो ....
  - डॉ (सुश्री) शरद सिंह

मुझे पसंद है
बारिश में भीगना 
पर तुमने तो 
बादल ही सुखा दिए 
मेरे आसमान के!
   
But you...

I love
 Getting wet in the rain
 but you
 the clouds dried up
 of my sky!
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#कविता #Poetry #poetrysociety #हिन्दीकविताएँ
#डॉसुश्रीशरदसिंह
#DrMsSharadSingh

03 September, 2022

ग़ज़ल | धूप बारिश की | डॉ (सुश्री) शरद सिंह


#अर्ज़कियाहै  - डॉ (सुश्री) शरद सिंह
हार्दिक धन्यवाद #युवाप्रवर्तक
यह ग़ज़ल आप इस लिंक पर भी पढ़ सकते हैं - https://yuvapravartak.com/69213/
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ग़ज़ल : धूप बारिश की
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

उसकी यादों सी सुनहरी है, धूप बारिश की।
फिर भी तन्हा है, इकहरी है, धूप बारिश की।

अपने हालात के   बारे में   सोचती रहती
एक गुमसुम सी दुपहरी है, धूप बारिश की।

उसने पैरोल पे छोड़ा है बादलों को अभी
खुद ही जज, खुद ही कचहरी है, धूप बारिश की।

सीलनें छन के चली जाएंगी बिस्तर से सभी
क्योंकि झीनी सी मसहरी है, धूप बारिश की।

छत से, मुंडेर पे, दीवार से कांधे पे "शरद"
इक फुदकती सी गिलहरी है, धूप बारिश की।
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#डॉसुश्रीशरदसिंह #ग़ज़ल #शायरी

25 August, 2022

ग़ज़ल | उसकी यादें | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

ग़ज़ल 
उसकी यादें
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

उसकी यादें दरवाज़े पर दस्तक बन टकराती हैं।
दिल की चौखट रो पड़ती है, आंखें भर-भर आती हैं।

ज़िन्दा रहना कमिट किया है, सांसें तो लेनी होंगी
वरना अब तो इच्छाएं भी, मुझसे ही कतराती हैं।

मुस्कानों का मास्क लगा कर, दर्द छिपाना बहुत कठिन
आंसू की बूंदें तो अकसर आंखों में उतराती हैं।

कभी-कभी ऐसा लगता है, मौन साध लें दुनिया से
अपनेपन की मृगतृष्णा भी राहों में भटकाती है।

जब तक हिम्मत साथ दे रही, लोहा लेंगे क़िस्मत से
देखें क़िस्मत हमको कितने, कैसे खेल खिलाती है।

वर्षा के बिन 'शरद' आएगी, कब तक आखिर ऋतुओं में
बदल रहे मौसम के क्रम अब, बात यही उलझाती है।
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#अर्ज़कियाहै 
#डॉसुश्रीशरदसिंह #DrMissSharadSingh 
#ग़ज़ल #शायरी #यादें #दरवाज़े #दिल

22 August, 2022

मुक्तक | दर्द हमेशा सच्चा है | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

मुक्तक |  दर्द हमेशा सच्चा है
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

कुछ भी ना होने से कुछ दर्दों का होना अच्छा है।
प्यार ग़लत हो सकता है पर दर्द हमेशा सच्चा है।

दिन भर की तनहाई लेकर, रात पहाड़े पढ़ती है
दिल को क्या समझाएं, दिल तो इक पागल-सा बच्चा है।
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#अर्ज़_किया_है ...
#दर्द  #हमेशा  #सच्चा है...
#डॉसुश्रीशरदसिंह #शायरी

20 August, 2022

आज फिर | ग़ज़ल | शायरी | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

एक सांझ ढल गई आज फिर
एक आस छल गई आज फिर
सूर्य फिर उतर गया पहाड़ से
एक रात मिल गई आज फिर
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

#अर्ज़कियाहै #आजफिर
#डॉसुश्रीशरदसिंह #हिंदीशायरी 
#shayarioftheday  #shayarimood #sadshayari #शायरी_अपनी_कलम_से🖤 #shayrilovers #shayri4all #sadshayri #drmisssharadsingh 

14 August, 2022

गीत | हर घर तिरंगा | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

प्रस्तुत है आज 14.08.2022 को युवाप्रवर्तक में प्रकाशित मेरा यह गीत....

गीत 
हर घर तिरंगा

- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

लहराए तिरंगा हर घर में
फहराए तिरंगा हर घर में....

रहे हरित से हरियाली
श्वेत रंग से खुशियाली
जोश भरे केसरिया रंग
नील चक्र भी भरे उमंग

मुस्काए तिरंगा हर घर में
लहराए तिरंगा हर घर में
फहराए तिरंगा हर घर में....

यही हमारा है अभिमान
यही   हमारा है  सम्मान
इसके लिए समर्पित हैं
अपने   तन, मन  प्रान

इतराए तिरंगा हर घर में
लहराए तिरंगा हर घर में
फहराए तिरंगा हर घर में....

हमको इस पर है नाज़ सदा
इसको  छूऐ न   कभी मृदा
ये है स्वतंत्रता की  पहचान
ये  सबसे  सुंदर  और  ज़ुदा

बस जाए तिरंगा हर घर में
लहराए तिरंगा हर घर में
फहराए तिरंगा हर घर में....
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🇮🇳 #हरघरतिरंगा 🇮🇳
#गीत #indipendenceday2022 #HarGharTiranga # #TirangaMeraAbhiman 
#indianindependence 
हार्दिक धन्यवाद #yuvapravartak 🙏
इस गीत को इन लिंक्स पर भी पढ़ सकते हैंः

And..