01 September, 2021

उदास दिल को तसल्ली | ग़ज़ल | डॉ शरद सिंह

उदास दिल को तसल्ली न दे सकोगे तुम
यूं  उम्र  भर   तो  मिरे पास न रुकोगे तुम

सलीब ग़म का रखा है मिरे जो कांधे पर
चलोगे  चार क़दम और फिर थकोगे तुम

उठा के सिर को कभीभी नहीं जिया तुमने
हरेक शख़्स के  आगे  में  जा झुकोगे तुम
- डॉ शरद सिंह

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8 comments:

  1. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार २ सितंबर २०२१ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।

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  2. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार ३ सितंबर २०२१ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

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  3. उठा के सिर को कभीभी नहीं जिया तुमने
    हरेक शख़्स के आगे में जा झुकोगे तुम

    बहुत सुंदर रचना

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  4. वाह!!!
    बहुत ही सुन्दर
    लाजवाब।

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