शायरी | फिर कहो | डॉ (सुश्री) शरद सिंह
आइना देखो, सम्हल लो, फिर कहो
ख़ुद से तो बाहर निकल लो, फिर कहो
बेअसर लगने लगीं बातें तुम्हारी
झूठ का लहज़ा बदल लो, फिर कहो
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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