Showing posts with label पाषाण. Show all posts
Showing posts with label पाषाण. Show all posts

28 November, 2021

पाषाण | कविता | डॉ शरद सिंह

पाषाण
      - डॉ शरद सिंह
आज 
आसमान 
कुछ ज़्यादा चमकदार 
कुछ हल्का नीला
कुछ उदारमना
लग रहा
कुछ तटस्थ भी

ऐसा क्यों?
बहुत सोचा
तो हुआ अहसास
आज सुबह से
आंखें नहीं भीगीं
दर्द नहीं गहराया
अपनों का छूटा साथ
कथित मित्रों के
घात, आघात
याद आई
सबकी
पर नहीं घेरा व्यथा ने
अर्थात् 
पाषाण होने की
प्रक्रिया में है हृदय
वेदना और संवेदना से परे।
      --------------
#शरदसिंह #डॉशरदसिंह #डॉसुश्रीशरदसिंह
#SharadSingh #Poetry #poetrylovers
#World_Of_Emotions_By_Sharad_Singh #HindiPoetry #हिंदीकविता #कविता #हिन्दीसाहित्य