शनिवार, मार्च 15, 2014

ओ मेरे रंगों ...

A poem of Dr Sharad Singh


O My Colors !
Oh my colors
Where are you
You've taken away my loved ones
My dreams are crushed
I ignored
Thrown into a corner
Like an empty Pichakari (color water gun)
I am now useless
Oh my colors ! I remember you too much...
- Dr Sharad Singh

10 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढ़िया ..होली की शुभकामनायें

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  2. उम्दा प्रस्तुति...!
    होली की हार्दिक शुभकामनायें ।
    RECENT POST - फिर से होली आई.

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  3. नहीं कोई जन अनुपयोगी,
    उसकी गति भी सार्थक होगी।

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  4. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन संदीप उन्नीकृष्णन अमर रहे - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  5. आज सब को साथ लेलो ,
    तन न केवल,
    मन रँगे
    ऐसे सुरीले रंग घोलो !

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  6. मन भर आया.....
    काश कोई रंग भरे इनकी जीवन में भी......

    सादर
    अनु

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  7. सुंदर रचना...रंगों से सराबोर होली की शुभकामनायें...

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  8. संवेदनाएं भरी अभिव्यक्ति ... होली कि बधाई ...

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