शनिवार, जुलाई 07, 2012

सावन के झूले


18 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही खुबसूरत सावन में भीगी पंक्तिया....

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  2. बहुत सुन्दर
    मीठे भरे दिन, खुशियों भरी याद हमेशा
    याद रहती है...
    :-)

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  3. सुंदर अभिव्यक्ति ...
    शुभकामनायें

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  4. तो उन्हें कहाँ भूले होंगे......
    :-)
    आते ही होंगे...
    अनु

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  5. बहुत सुंदर चित्रमय अभिव्यक्ति,,,,,आभार

    RECENT POST...: दोहे,,,,

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  6. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल कल रविवार को 08 -07-2012 को यहाँ भी है

    .... आज हलचल में .... आपातकालीन हलचल .

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  7. पिछले सावन के वो पलछिन मुझे नहीं भूले.....
    भींगे आज इस मौसम में लगी कैसी ये अगन
    बहुत खूब

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  8. सुंदर भावभिव्यक्ति...समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है।

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  9. प्रशंसनीय....। मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा। धन्यवाद।

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  10. जी.... झूलों की रस्सी कभी-कभी रिश्तों की रस्सी से सख्त होती है... और झूला झूलने का आमंत्रण झूले की रस्सी पर ही नहीं, रिश्तों की रस्सी पर बी निर्भर होता है....।

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