12 October, 2021

डॉ शरद सिंह सागर की 2021 की 'पिंक सागर' की 100 शक्तिशाली महिलाओं में

पिंक सागर! मेरा नाम सागर की 2021 की 100 शक्तिशाली महिलाओं की आपकी सूची में है...
 इस सम्मान के लिए हार्दिक धन्यवाद 🙏

Pink Sagar! my name is in your list of Sagar's 100 Powerful Women of 2021...
Hearty Thanks for this Honour 🙏
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10 October, 2021

सयानी लड़की | कविता | डॉ शरद सिंह

सयानी लड़की
     - डॉ शरद सिंह

वह लड़की
अपने हड़ीले
कमज़ोर दिखने वाले
बाएं कांधे पर
लाद कर 
प्लास्टिक की बोरी
घूमती है
एक छोकरे के साथ
जो यक़ीनन भाई है उसका

वह बीनती है
भाई के साथ
दारू के खाली पाऊच
और डिस्पोज़ल गिलास
दारू की दूकान  के सामने
अलसुबह से,
जब लोग 
दौड़ रहे होते हैं
अपनी सेहत बनाने

चिरकुट फ्राक वाली
वह आठ सालाना लड़की
जानती है कि
उन पाऊच और गिलासों में
वे भी होंगे
जिन्हें इस्तेमाल किया होगा
कल देर शाम गए
उसके पियक्कड़ बाप ने

हर दिन वह
बीनती है पाऊच और गिलास
बदले में हर दिन
कबाड़ी से पाती है
बीस रुपए
हथिया लेता है उसमें से
पांच रुपए भाई
दस रुपए बाप
और बचे पांच
वह रख देती है
अपनी कुटी-पिटी मां की
सख़्त हथेली पर
स्वेच्छा से
और खुश हो जाती है
पुंगी पा कर बासी रोटी की

है न लड़की सयानी?
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09 October, 2021

असंभव-सा संभव | कविता | डॉ शरद सिंह

असंभव-सा संभव

     - डॉ शरद सिंह
किसी भी समय
उठने लगती हैं
सीस्मिक तरंगें
कांपने लगती है
भावनाओं की सतह
सरकने लगती हैं
विश्वास की
टेक्टोनिक प्लेट्स

मेरी सांसोंं का
सिस्मोमीटर
निरंतर बनाता है ग्राफ
धड़कन के
रिक्टर स्केल पर
और करता है कोशिश
नापने की
पीड़ा से उपजे
भूकंप की तीव्रता को

दौड़ती है तेजी से सुई
और
लॉगरिथमिक प्वाइंट
दर्शाता है तीव्रता
कभी सात 
तो कभी दस

यह असंभव-सा
संभव,
करता है
विचलित मुझे कि
विध्वंस के
अंतिम बिन्दु पर
पहुंच कर भी
बची हुई है
मेरे अस्तित्व की धरती

ये तो हद है-
सोचने लगे हैं
मेरी पीड़ा के
सिस्मोलॉजिस्ट

हैरत तो होगी ही
महाविनाश से
गुज़र कर भी
कोई बचता है भला?
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08 October, 2021

अपराधी | कविता | डॉ शरद सिंह

अपराधी
        - डॉ शरद सिंह

मेरी ख़ुशियों की
मृत देह को
कोई जांचे
मेग्नीफाईन ग्लास से
और कर ले मिलान
मेरी क़िस्मत के लेखे से
तो उसे मिलेंगे
शव की गर्दन पर
तुम्हारे ही फिंगरप्रिंट
हर फोरेंसिक जांच में

तुम्हारे ही पैरों के निशान
मेरे आसपास

स्निफर डॉग पाएगा
तुम्हारी ही गंध
मेरे घर से

हर साक्ष्य
चींख-चींख कर
करेगा इशारा तुम्हारी ओर

मगर
तुम बच निकलोगे साफ़
तुम्हारी सर्वसत्ता
बचा लेगी तुम्हें
हमेशा की तरह,
बावज़ूद
हत्या का 
जघन्य अपराध 
करने पर भी

किन्तु नहीं करेंगी माफ़
मेरी मृत ख़ुशियां तुम्हें
और मैं भी नहीं,
हे ईश्वर !
तुम मेरे अपराधी हो
और
रहोगे सदा अपराधी ही
सबूत और दलीलों से भरी 
मेरी अदालत में
हमेशा-हमेशा।
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04 October, 2021

छापामार उदासी | कविता | डॉ शरद सिंह

छापामार उदासी
        - डॉ शरद सिंह

उदासी
किसी छापामार की तरह 
आ धमकती है- 

बादलों से घिरी
अंधियारती शाम 
या फिर
किसी की याद,
किसी का छोड़ जाना,
किसी मित्र का
हो जाना अजनबी

पेंसिल की नोंक का
पहले ही शब्द पर टूट जाना,
चुक जाना पेन की रिफिल का
चार अक्षर लिखते ही

बात करने की
बलवती इच्छा पर
नेटवर्क व्यस्त मिलना,
या फिर, यूं ही अचानक
अकेला महसूस करना ख़ुद को

बस, एक बहाना
कोई भी, कैसा भी
उदासी 
हरदम 
फ़िराक में रहती है
आ धमकने की
चैन के दो पल भी
ज़ब्त कर लेने की
हताशा-निराशा का 
पंचनामा
लगा देता है
उस पर मुहर
मुस्तैदी से।
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03 October, 2021

सपन कपासी | नवगीत | डॉ शरद सिंह


नेह पियासी

   - डाॅ (सुश्री) शरद सिंह


मीलों लम्बी

घिरी उदासी

        देह ज़रा-सी।


कुर्सी, मेजें,

घर, दीवारें

सब कुछ तो मृतप्राय लगें


बोझ उठाते

अपनेपन का

पोर-पोर की तनी रगें


बंज़र धरती

नेह पियासी

       धार ज़रा-सी।


गलियां देखें

सड़के घूमें

फिर भी चैन न मिल पाए


राह उगा कर 

झूठे   सपने

नई यात्रा करवाए


रोती आंखें

सपन कपासी

     रात ज़रा-सी।

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02 October, 2021

कौन हैं गांधी | कविता | डॉ शरद सिंह

कौन हैं गांधी?
        - डॉ शरद सिंह

गांधी 
मात्र एक शब्द नहीं
मात्र एक उपनाम नहीं
बन जाता है एक विचार 
जब उसमें जुड़ जाते हैं संबोधन
गिरमिटिया
बापू
या महात्मा!

गांधी 
मात्र एक शब्द नहीं
मात्र एक उपनाम नहीं
बन जाता है
जीवन जीने का ढंग
जब उसमें समा जाती है
सत्यता, सादगी और
सहजता

गांधी
नोटों पर छपी 
सिर्फ़ तस्वीर नहीं
वह तो 
समूचे विश्व में
साख है, गारंटी है
भारतीयता की।

कौन हैं गांधी?
क्या वही
जिसके सीने में
उतार दी थीं गोलियां
गोडसे ने।

नहीं,
गांधी
सिर्फ़ वही नहीं
जितना हमने सुना, पढ़ा
गांधी को 
जान सकता है वही,
पूरी तरह
जिसने भी
कभी किया हो
सत्य के साथ कोई प्रयोग,
गांधी को 
जान सकता है वही
पूरी तरह
सिर्फ़ वही!
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