![]() |
| Dr (Miss) Sharad Singh |
शंख चटके
- डाॅ (सुश्री) शरद सिंह
वादियों-सा दर्द मेरा
शाम से पहले
घिरता अंधेरा।
रोज़ सूरज
घूमता है सिर झुकाए
बंद मुट्ठी में
उजाले को दबाए
टूटता है एक तारा
फूंकने को सिर्फ़
अपना ही बसेरा।
शंख चटके
रूठते हैं सब यहां
जिप्पसियों-सा
मन फिरे जाने कहां
अपशकुन का ज्यों इशारा
स्वस्तिक उल्टा
हवाओं ने उकेरा।
--------
(मेरे नवगीत संग्रह ‘‘आंसू बूंद चुए’’ से)
#नवगीत #नवगीतसंग्रह #आंसू_बूंद_चुए
#हिन्दीसाहित्य #काव्य #Navgeet #NavgeetSangrah #Poetry #PoetryBook #AnsooBoondChuye
#HindiLiterature #Literature
![]() |
| Shankh Chatke - Dr (Miss) Sharad Singh, Navgeet, By Ansoo Boond Chuye - Navgeet Sangrah |

