मेरी एक कविता अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस
वृद्धजन दिवस
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- डॉ शरद सिंह
उन सभी वृद्धजन को मेरा प्रणाम -
जो नहीं जानते
कि आज है वृद्धजन दिवस !!!
वह जो लगा रहा है अदालत के चक्कर
दशकों से
अपने मृत बेटे को न्याय दिलाने,
झुक गई है उसकी कमर
घिस गया है चश्मा,
उस वृद्ध को मेरा प्रणाम !
वह मां जो अपनों के द्वारा
ठुकरा दी गई
और बैठी है सड़क के किनारे
टूटा, पिचका कटोरा लिए भीख मांगते
पेट की खातिर
दुआएं देती अपने बच्चों को
उस मां को प्रणाम !
मेरा प्रणाम, उस दादी को, उस नानी को,
उस दादा को, उस नाना को
जो अपने नाती-पोतों को
लेना चाहते हैं अपनी गोद में
सुनाना चाहते हैं एक कहानी
मगर छोड़ दिए गए हैं घर से दूर
एक वृद्ध आश्रम में।
तो, मेरा प्रणाम उन सभी वृद्धजन को
जो नहीं जानते कि
आज वृद्धजन दिवस है !!!
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