Showing posts with label नज़्म. Show all posts
Showing posts with label नज़्म. Show all posts

30 January, 2019

इंतज़ार (नज़्म) - डॉ शरद सिंह

इंतज़ार (नज़्म)
Dr (Miss) Sharad Singh

------------------
सब्ज़ पत्तों का
इंतजार
अभी तक है उसे
कि उसके आने का
ऐतबार अभी तक है उसे
शज़र वो देख रहा रास्ता
महीनों से
हुआ है कैसा बदल
आज के जमाने में
बदल रही है यहां रुत भी
बेवफ़ा की तरह.......

- डॉ शरद सिंह


Intezar - Nazm of Dr ( Miss) Sharad Singh


लहू का रंग (नज़्म) - डॉ शरद सिंह

Dr (Miss) Sharad Singh
लहू का रंग (नज़्म)
-----------------------
लहू का रंग न बदला है
न बदलेगा कभी
फ़िजा में घोल दो जितनी भी
सियासत की लहर
लहू तो जिस्म में उसके भी बह रहा है जो
जल रह है ग़रीबी की आग में देखो
रहेगा वो तो हमेशा की तरह फुटपाथी
कि जिसके ज़ेब में रहता है
रोज सन्नाटा
वो हाथठेले पे ख़्वाबों को बेचता ही रहा
कि जिसके हाथ में
ख़्वाबों की लकीरें ही न थीं
लहू तो लाल था उसका
जिसे दवा न मिली
लहू तो लाल था उसका भी
जिसे दुआ न मिली
लहू तो लाल ही होता है हर किसी का मगर
ज़र्द दिखता है जो हो जाय धरम का मारा
ज़र्द दिखता है जो हो जाय शरम का मारा
लहू के रंग को रहने दो लाल ही वरना
पड़ेगा खुद के लहू से यूं एक दिन डरना...।

24 January, 2019

तेरी याद की शम्मा (नज़्म) - डॉ. शरद सिंह

 
Dr (Miss) Sharad Singh

तेरी याद की शम्मा
(नज़्म)
----------------------------
मेरी तनहाई के आले में
तेरी याद की शम्मा
उजाले की कसम ले कर
जली जाती है रातो-दिन
मेरी सांसें भी चलती हैं तो
धीमी..और धीमी सी
कहीं झोंका मेरी सांसों का शम्मा को बुझा न दे
कि जब तक है खड़ी दीवार मेरे जिस्म की, तब तक
ये आला है, ये शम्मा है, ये सांसे हैं, ये यादें हैं
कि उसके बाद तनहाई रहेगी खुद ही तन्हा सी
कि खंडहर टूट जाएगा
कि आला छूट जाएगा
कि शम्मा की बुझी बस्ती
अंधेरा लूट जाएगा.....।
- डॉ. शरद सिंह


11 January, 2019

मैं कौन हूं...- डॉ. शरद सिंह

 
Mai Kaun Hun ... (Nazm) by Dr (Miss) Sharad Singh

मैं कौन हूं...
--------------
मैं कौन हूं ये बताना कभी नहीं मुमकिन
मगर मैं हूं तो इसी क़ायनात का ज़र्रा
नहीं हूं चांद, नहीं आफ़ताब,
कुछ भी नहीं
यही बहुत है कि
दुनिया का एक हूं हिस्सा!
- डॉ. शरद सिंह