मंगलवार, अगस्त 15, 2017

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !!!

सदा रहे आंखों में अपनी स्वतंत्रता का सपना
उस सपने के मूर्त्तरूप में रहे तिरंगा अपना
Happy Independence Day by Dr Sharad Singh

Happy Independence Day  !!!

बुधवार, अगस्त 09, 2017

तुम और मैं ... डॉ शरद सिंह

Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh

तुम और मैं
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पृथ्वी घूमती है
सूर्य के गिर्द
सूर्य घूमता है अपनी ही धुरी में
आकाशगंगा के दूधिया झुरमुट के बीच
पहचानता हुआ
अपनी पृथ्वी को
पृथ्वी जो डूबी है प्रेम में
सूर्य के ताप से
जल जाने के भय को भुला कर
बिसर जाती हैं सारी बाधाएं, सारे कष्ट
प्रेम में पड़ कर
देख लो, खुद को
तुम और मैं
अपनी-अपनी धुरी में घूमते
सूर्य और पृथ्वी ही तो हैं।
 

- डॉ शरद सिंह

मंगलवार, अगस्त 08, 2017

वह प्रेम है ... डॉ शरद सिंह

Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh

वह प्रेम है
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वह
इतना हल्का भी नहीं
कि उड़ जाए हवा में
इतना भारी भी नहीं
कि पैंठ जाए तलछठ में
वह
भटकता नहीं
चाहे लोग उसे भटकाव ही मानें
वह जलता नहीं
चाहे उसे आग का दरिया ही मानें
वह
एक अहसास है
कोमल, पवित्र
मानो धूप और चांदनी

वह
प्रेम है
मत उछालो उसे फ़िकरे-सा
यहां-वहां
प्रेम की अवमानना से बड़ा अपराध
कोई नहीं।

- डॉ शरद सिंह

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बुधवार, जुलाई 26, 2017

तो फिर चलो .... डॉ. शरद सिंह

Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh

तो फिर चलो
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जंग खाए पुराने तालों
बंद दरवाज़ों
और यादों के पिटारों में
क्या कोई फ़र्क़ होता है ?

नहीं तो !
रस्टिक-ताले खुलते नहीं
किसी भी चाबी से
तोड़ दिए जाएं ताले गर,
दरवाज़े कराहते हैं खुलते हुए
कमरे के भीतर बसी बासी हवाओं का झोंका
भयावह बना देता है यादों को

तो फिर चलो,
बहुत पुरानी यादों को
कहीं कर दें विसर्जित
उससे नई यादों को संजोने के लिए
..... कुछ देर मुस्कुराने के लिए।

- डॉ. शरद सिंह

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मंगलवार, जुलाई 25, 2017

लकीरों को हराते हुए .... डॉ. शरद सिंह

Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh

लकीरों को हराते हुए
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कॉपी के फटे हुए पन्ने पर
नहीं है आसान
खिलाना
प्यार का गुलाब
कुछ लकीरें लांघनी होंगी
कुछ लकीरें मिटानी होंगी
कुछ लकीरें छोड़नी होंगी
ताकि जिया जा सके
अपना जीवन
अपना प्यार
अपने ढंग से
लकीरों को हराते हुए।

इन दिनों .... डॉ. शरद सिंह

Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh

इन दिनों
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सूरज को बर्फ होते
चांद को जलते
पंछियों को तैरते
मछलियों को उड़ते
मैंने देखा है
उसे
इन दिनों बदलते