मंगलवार, मई 23, 2017

इकतारा ... डॉ शरद सिंह

Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh


इकतारा
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ध्वनियां
बहुत कुछ कहती हैं
कभी सार्थक, कभी निरर्थक
मौन पी जाता है सारी ध्वनियों को
छानता है धैर्य की छन्नी से
और अच्छी ध्वनियों को
उंडेल देता है इकतारे पर
तभी तो
इकतारा होता है झंकृत
किसी देह की तरह ...

- डॉ. शरद सिंह

#SharadSingh #Poetry #MyPoetry

अब तो चाहिए... डॉ शरद सिंह

Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh

अब तो चाहिए...
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बहुत थकान होती है -
उधार के रिश्तों को जीते हुए
जैसे ओढ़ी हुई मुस्कान
थका देती है होंठों को
गालों को
और आंखों की कोरों को
हां,
बहुत थकान होती है -
जब रिश्तों को जीते हैं
रिश्तों के बिना
जीत की उम्मींद में
फेंके हुए पासों की तरह।

और थक-हार कर
अकसर सोचता है मन
ये ज़िन्दगी थकी-थकी सी है
अनुबंधों के लिबास तले
ओह, अब तो चाहिए एक सुई या पिन
जिससे उधेड़ा जा सके
इस लिबास की सीवन को।
.... - डॉ. शरद सिंह

#SharadSingh #Poetry #MyPoetry

गुरुवार, मई 18, 2017

मैं ग़ज़ल की एक किताब हूं ... - डॉ शरद सिंह

लम्बी बहर का एक शेर मेरे ग़ज़ल संग्रह ‘‘पतझड़ में भीग रही लड़की’’ से ....
Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh

Few lines (a Sher) from my Ghazal collection (poetry book) "Patajhar men bheeg rahi ladaki" ....

गुरुवार, मई 11, 2017

कोशिश करते तो सही .... डॉ. शरद सिंह

Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh

कोशिश करते तो सही ....
                    - डॉ. शरद सिंह


तुम रखते मेरी हथेली पर
एक श्वेत पुष्प
और वह बदल जाता
मुट्ठी भर भात में
तुम रखते मेरे कंधे पर अपनी उंगलियां
और हो जाती सुरक्षित मेरी देह
तुम बोलते मेरे कानों में कोई एक शब्द
और बज उठता अनेक ध्वनियों वाला तार-वाद्य

सच मानो,
मिट जाती आदिम दूरियां
भूख और भोजन की
देह और आवरण की
चाहत और स्वप्न की

बस,
तुम कोशिश करते तो सही।
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#SharadSingh #Poetry #MyPoetry #Koshish #Try

शुक्रवार, मई 05, 2017

अंदर की आवाज़ .. .- डॉ शरद सिंह

Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh

अंदर की आवाज़
             - डॉ शरद सिंह
एक दिन
जब मन की कोमल, महीन ध्वनियां
बदल जाती हैं अनहद नाद में
सोई हुई शिराओं में जाग उठती हैं #ऋचाएं
कंठ हो जाता है सामवेदी
गाने लगता है #प्रयाण-गीत
शब्द फूंकने लगते हैं दुंदुभी
और भुजाएं व्याकुल हो उठती हैं समुद्र-मंथन को
.... और सब कुछ बदल जाता है उसी पल
किसी सुप्त #ज्वालामुखी के फूट पड़ने जैसा
ठीक उसी समय पता चलता है अंदर की आवाज़ का
वह आवाज़ जो गढ़ती है एक नए #इंसान को पुराने इंसान के भीतर

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#InnerVoice #SharadSingh #Poetry #MyPoetry

गुरुवार, मई 04, 2017

और मैं देखती रहूंगी....- डॉ शरद सिंह

Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh

और मैं देखती रहूंगी....

मिलोगे तुम मुझे
एक अरसे बाद
यूं ही अचानक
किसी कॉन्फ्रेंस में, सेमिनार में
या किसी मेट्रो में
बेशक़ सोचा था मैंने!


नहीं सोचा था तो ये...

कि मिलोगे तुम किसी चाय-पार्टी में
मेरी पुरानी सहेली के नए हमसफ़र बन कर
और मैं देखती रहूंगी मूक-दर्शक की तरह
अपने अतीत के पन्नों को फाड़ती हुई ...


- डॉ. शरद सिंह

#MyPoetry
#Miss_Sharad_Singh

शनिवार, अप्रैल 29, 2017

उदास रहने की आदत मुझे न हो जाए ...- डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh
 
खुशी का एक भी लम्हा कहीं न खो जाए
उदास रहने की आदत मुझे न हो जाए
बला की धूप है ख़्वाबों में तो नहीं शिक़वा
ये ग़म की छांह कहीं और जा के सो जाए ... - डॉ शरद सिंह


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