मंगलवार, नवंबर 14, 2017

लावा .... डॉ शरद सिंह

Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh

लावा
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सीने में
धैर्य की टेक्टोनिक प्लेट्स
टकरा रही हैं आपस में

दरकने को आतुर है
धरती होंठों की
अनुभवों के
मोटे क्रस्ट के नीचे
उबल रहा है लावा
इन दिनों
गोया मुझमें मौजूद है
एक धरती
जिसे हो चला है
असहनीय
तुम्हारा भीतरघात-सा
अपर्यावर्णीय आचरण।
- डॉ शरद सिंह

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शुक्रवार, नवंबर 10, 2017

It's my winter look

Dr (Miss) Sharad Singh
It's my winter look ... Dr Sharad Singh
आखिरकार जाड़ा आ ही गया और निकल आए गर्म कपड़े।

मंगलवार, नवंबर 07, 2017

मन एक पंछी .... डॉ शरद सिंह

Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh

मन एक पंछी
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मन
एक पंछी ही तो है
डोलता है, फुदकता है
हो जाता है उदास
सूखी डालियों पर
और खिल उठता है
किसी फूल की तरह
हरी पत्तियों के बीच
मन का मधुर स्वर
मन ही सुनता है
क्यों कि मन
वह पंछी नहीं
जो दिखे सबको, रिझाए सबको, मोहे सबको
मन एक पंछी है
निरा व्यक्तिगत
नितान्त अपना
किसी गोपन की तरह।
- डॉ शरद सिंह


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शुक्रवार, नवंबर 03, 2017

वह अपनापन .... डॉ शरद सिंह

Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh
वह अपनापन
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मेरी स्मृतियों का वह गांव
मुझे पुकारता है प्रतिदिन
जहां -
लम्बी, पतली, कच्ची सड़क के
दोनों ओर थे ऊंचे-ऊंचे पुराने वृक्ष,
बिजली की प्रतीक्षा में खड़े
तारविहीन खम्बे,
कुछ खपैरली मकान,
मकानों में छोटी-छोटी खिड़कियां
मंझोले दरवाज़े
गोबर से लिपे आंगन
और
एक अहसास अपनेपन का ।

वह गांव आज भी वहीं हैं
आ गई है बिजली भी
लेकिन नहीं है तो वे सारे वृक्ष
सागौन की गंध से तर वह सोंधापन
और वह अपनापन
ये वो गांव नहीं जो मुझे बुलाता है
प्रतिदिन ।

- डॉ शरद सिंह

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मंगलवार, अक्तूबर 31, 2017

मुस्कुराना सीख लो .... डॉ शरद सिंह

A Ghazal by Dr (Miss) Sharad Singh

 
ज़िंदगी कांटों भरी, दामन बचाना सीख लो
मुश्किलों में भी ज़रा तुम मुस्कुराना सीख लो
क्या पता कब मौत आ जाए चुराने के लिए
दो घड़ी तो साथ अपनों के बिताना सीख लो
- डॉ शरद सिंह


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मंगलवार, अक्तूबर 24, 2017

सिर्फ़ एक भावना ... डॉ शरद सिंह

Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh

सिर्फ़ एक भावना
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जब किसी को देख कर
अचानक
खिल जाएं
फूल ही फूल
मन के मुरझाए पौधे में
तो ठीक उसी वक़्त
सो जाते हैं सारे शब्द
सारी ध्वनियां
सारी चेष्टाएं
कि -
ठीक उसी समय
जाग उठती है
सिर्फ़ एक भावना
अर्थात्
प्रेम।

- डॉ शरद सिंह


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सोमवार, अक्तूबर 23, 2017

About Dr (Miss) Sharad Singh as Spacial Personality in Dainik Bhaskar Sagar Edition Diwali Visheshank 2017

कैप्शन जोड़ें
एक दीपक तो जलाओ, दूर हो मन का अंधेरा
क्लेश मिट जाए, रहे बस, रोशनी का ही बसेरा

  ......मेरी इन पंक्तियों के सहित "दैनिक भास्कर" ने आज मेरे व्यक्तित्व एवं कृतित्व को अपने "सार्थक दिवाली लक्ष्मी " विशेषांक में स्थान दिया ... दैनिक भास्कर की इस आत्मीयता की अत्यंत आभारी हूं !

🎆Thank you Dainik Bhaskar !🎆
🎇Happy Sarthak Diwali