शुक्रवार, सितंबर 14, 2018

हिन्दी कहां खो रही ... - डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr Sharad Singh
हिन्दी दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं ....और एक चिन्तन...

सोचती हूं कि हिन्दी कहां खो रही
बढ़ रहा आंग्ल का ही है खाता-बही
एक पर एक ग्यारह नहीं है पता
आज बच्चे ‘इलेवन’ को जानें सही
‘इंडिया’ जो कहें आधुनिक-सा लगे
नाम ‘भारत’ तो मानो पुरातन वही
चाह मन की ये सबसे कहूं आज मैं
काश! दुनिया की भाषा हो हिन्दी कभी
- डॉ शरद सिंह


#हिन्दी_दिवस
#हिन्दीदिवस

बुधवार, सितंबर 12, 2018

ज़िन्दगी चढ़ाव है, उतार है - डॉ. शरद सिंह

Shayari of Dr Sharad Singh
ज़िन्दगी  चढ़ाव है,   उतार है
रंज़िश के बीच छुपा  प्यार है
मंदिर की सीढ़ियां सिखाती हैं
मिथ्या  हर जीत और  हार है
- डॉ. शरद सिंह


अपने शहर से दूर - डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr Sharad Singh
अपने शहर से दूर
गुज़ारे जो चंद रोज़
लगता है मुद्दतों से
घर ही नहीं गए हैं
- डॉ शरद सिंह

शुक्रवार, अगस्त 31, 2018

सोचता होगा ...... डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr Sharad Singh

              सोचता होगा
(मेरे ग़ज़ल संग्रह ‘परझर में भीग रही लड़की’ से यह मेरी ग़ज़ल) 
                       - डॉ शरद सिंह

सोचता होगा, रखे वह उंगलियों को भाल पर।
छोड़ आए हैं  संदेशा,  काढ़ कर  रूमाल पर।

वह परिधि में  क़ैद अपनी और हम भी क़ैद हैं
व्यर्थ है चर्चा, चहकते  पंछियों  के  हाल पर।

याद की  सीपी उठा कर  आ गई है ज़िन्दगी
तैरती हैं  डोंगियां,  अब झिलमिलाते  ताल पर।

चंद पन्नों की तरह जब कर दिया नत्थी समय ने
क्यों करें महसूस,  सूखी पत्तियों-सा  डाल पर।

दोष मत देना  कभी भी  लड़खड़ाते  भाग्य को
टूटती है अश्व की लय  भी  उखड़ती  नाल पर।

जा चुकी है आयु गुड़िया और  गुड्डा खेलने की
लिख रही हैं   ढेर चिन्ताएं, सफ़ेदी  बाल पर।

क्यों  अंधेरे की निराशा  ओढ़ कर बैठें ‘शरद’?
फिर  उजले  की लकीरें, खींच  डालें भाल पर।

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https://drsharadsingh.blogspot.com/2017/03/patjhar-me-bheeg-rahi-ladki-ghazal-book.html

शुक्रवार, अगस्त 24, 2018

प्यार की सौगंध भी क्या चीज़ है.... डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr Sharad Singh

बांह का तकिया लगा कर सिर टिकाए
हम  विचारों  के   नगर में   घूम आए
प्यार  की   सौगंध    भी क्या चीज़ है
हो भले झूठी, मगर  फिर भी  लुभाए
- डॉ शरद सिंह

(मेरे ग़ज़ल संग्रह ‘पतझर में भीग रही लड़की’ से)

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गुरुवार, अगस्त 23, 2018

शनिवार, अगस्त 18, 2018

आंख सोए तो ख़्वाब आएंगे... डॉ शरद सिंह


Shayari of Dr Sharad Singh
आंख सोए तो ख़्वाब आएंगे
कौन जाने क्या साथ लाएंगे
धूप जैसी हो चांदनी, बेशक़
चाहतों   के  दिए   जलाएंगे
- डॉ शरद सिंह

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