तो फिर...
- डॉ शरदसिंह
जो भी है दिखता
वह सब लौकिक
जो नहीं दिखता
वह अलौकिक
प्रेम में
लौकिक है देह
और प्रेम अलौकिक
शत्रुता में
लौकिक है देह
और शत्रुता अलौकिक
मृत्यु में
लौकिक है देह
और मृत्यु अलौकिक
किताब में छपे अक्षर
लौकिक हैं
भावनाएं अलौकिक
वे सब हैं आज
अलौकिक
जो नहीं दिखते
शामिल हैं उनमें
तमाम देवता भी
जो नहीं इस धरती पर
नहीं दिखते
जो गए इस धरती से
वे कभी लौट कर नहीं आते
तो फिर
अलौकिक देवता
कैसे आएंगे भला?
अपने-अपने दुख
हम सब को ढोना है
देवता को नहीं
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