बुधवार, अगस्त 08, 2012

नाच उठा मन ....


17 टिप्‍पणियां:

  1. श्रृंगार रस से ओतप्रोत भीनी कविता बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह शरद जी क्या खूब कहा है |खुले आम चोरी सब मौसम का दोष है |आभार |

    उत्तर देंहटाएं
  3. आओ, तुमसे तुम्हेँ चुरा लूं
    बनके चोरनी बारिश मेँ
    बहुत सुन्दर...!

    उत्तर देंहटाएं
  4. उत्तर
    1. बढ़िया दृश्य-
      पर यह निगेटिव -भाव

      बारिश में रिसिया गया, खिसियाया मनमीत |
      सर्दी खांसी फ्लू से, कौन सका है जीत |
      कौन सका है जीत, रीत श्रैंगारिक कैसी |
      दिखलाया यूँ प्रीत, गई पानी में भैंसी |
      सुबह सुबह का दृश्य, डाक्टर शरद दवा दें |
      डबल डोज खा जाँय, मस्त सी फिजा गवाँ दें ||

      हटाएं
  5. ये चंद पंक्तियों के भाव जितने गहरे हैं , मन को अंतर तक छू गए.

    उत्तर देंहटाएं
  6. बारिश में मन को चुराती सुंदर प्रस्तुति,,,बधाई शरद जी,,,,
    RECENT POST...: जिन्दगी,,,,

    उत्तर देंहटाएं
  7. भावजगत की रिम झिम होती ,सुनो सहेली बारिश में
    नील गगन मस्ताया कैसा देख सहेली बारिश में.

    उत्तर देंहटाएं
  8. आदरणीया डॉ शरद जी मनमोहक कविता सावन की हरियाली और झमाझम बारिश में प्रणय गीत... मोर मन झूम उठा ....जय श्री राधे
    भ्रमर ५

    उत्तर देंहटाएं
  9. वाह! बहुत सुन्दर.
    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ.

    शरद जी,समय मिलने पर मेरे ब्लॉग पर आकर
    'फालोअर्स और ब्लोगिंग'के सम्बन्ध में मेरा मार्ग दर्शन कीजियेगा,

    उत्तर देंहटाएं