12 June, 2019

Evening - Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh

 
Evening - Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh

Evening
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The evening comes
with a bale of memories
If away the person,

which should be near,
at front of eyes
as evening star.
- Dr (Miss) Sharad Singh

 

#PoetryOfMissSharadSingh
#evening #bale #memories #person
#evening_star

आपराधिक हो चला वातावरण ...(ग़ज़ल) - डॉ शरद सिंह

Aapradhik Ho Chala Vatavaran ... Ghazal of Dr (Miss) Sharad Singh
उन सभी बच्चियों को याद करते हुए जो आज जीवित होतीं अगर समाज में दरिंदे न होते...

आपराधिक हो चला वातावरण
हो चला संदिग्ध सबका आचरण
जब सुरक्षित ही नहीं हैं बच्चियां
उठ गया इंसानियत का आवरण

- डॉ शरद सिंह


05 June, 2019

अब तो प्रदूषण घटाएं ...(ग़ज़ल) - डॉ शरद सिंह

A Ghazal of Dr (Miss) Sharad Singh on World Environment Day 
विश्व पर्यावरण दिवस पर अर्ज़ है...
अब तो प्रदूषण घटाएं
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अभी भी समय है,  ज़रा चेत जाएं
हवाओं का अब तो प्रदूषण घटाएं

नदियों के जल को चलो साफ कर लें
झीलों को फिर से चलो हम सजाएं

ध्वनियों की सीमा को तोड़ें कभी न
गाड़ी के हॉरन  ज़रा  कम  बजाएं

कूड़े के  ढेरों,  खुली  नालियों से
अपने शहर को  भी मुक्ति दिलाएं

'शरद'ये शपथ लें प्रदूषण रहित इक
विरासत में  पर्यावरण   छोड़ जाएं
- डॉ शरद सिंह


03 June, 2019

मुहब्बत से भीगी .. ( ग़ज़ल ).. - डॉ शरद सिंह

Muhabbat Se Bhigi ... Ghazal of Dr (Miss) Sharad Singh

मुहब्बत से भीगी 

 हमारी दुआयें असर ला रही हैं
किसी राह भूले को घर ला रही हैं


हवायें मेहरबान होने लगी हैं
मुहब्बत से भीगी ख़बर ला रही हैं


हैं दिल में जो अंगड़ाइयां चाहतों की
नई शायरी की बहर ला रही हैं


वो मजबूरियां हल नहीं हो रही हैं
जो गांवों से सबको शहर ला रही हैं


'शरद' को है उम्मीद उन औरतों से
जो बदलाव की इक लहर ला रही हैं
- डॉ शरद सिंह


#DrMissSharadSingh

25 May, 2019

सूरत हादसा ...भावभीनी श्रद्धांजलि... वे अभी बच्चे ही तो थे - डॉ शरद सिंह


सूरत हादसा .... भावभीनी श्रद्धांजलि...

वे अभी बच्चे ही तो थे
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व्यवस्था की अनदेखी ने
बनने दिया था उनके लिए
लाक्षागृह
जिसमें नहीं था कोई गुप्तद्वार
वे जलते रहे
और मुंहचुराती रही व्यवस्था
अवैध निर्माण के नीचे
वे अभी बच्चे ही तो थे
भविष्य के सुनहरे सपनों से भरे हुए।
- डॉ शरद सिंह

24 May, 2019

Hope - Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh

Hope - poetry of Dr (Miss) Sharad Singh

Hope
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Who will be win
Who will be loose
Who will be crow,

Who will be goose
Nothing a matter.
We should hope only
for more better.
- Dr (Miss) Sharad Singh


PoetryOfMissSharadSingh
#Win #loose #hope #better

21 May, 2019

We are criminals - Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh on Crisis of Biodiversity

We are criminals - Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh on Crisis of Biodiversity


We are criminals
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We losing slowly our fishes,
our birds, our tigers
and many medicines
We losing our air, water and land
actually we losing our biodiversity
by ourselves
We are criminals of our mother nature ...
- Dr (Miss) Sharad Singh