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20 December, 2020

टूटती उड़ान | डाॅ (सुश्री) शरद सिंह | नवगीत | संग्रह - आंसू बूंद चुए

Dr (Miss) Sharad Singh


टूटती उड़ान

- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

पथरीली रातें 
और दिवस बंजर।

बंधुआ-सी 
देह रहे 
हरदम बीमार 
लोटे भर 
शोक और 
चुल्लू भर हार

अनुभूति घातें 
रचें खेल दुष्कर।

बाबा के
गमछे में 
टीस भरी गंध 
अपनों ने 
फूंक दिए 
नेह के प्रबंध

जुदा-जुदा बातें 
अलग-अलग आखर।

सकुचाई 
उम्मीदें 
टूटती उड़ान 
तिनकों की 
झोपड़ी 
फूस का मचान

टुकड़ों-सी गातें
और दुखी छप्पर।

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(मेरे नवगीत संग्रह ‘‘आंसू बूंद चुए’’ से)