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18 December, 2020

जाड़े की रात | डॉ शरद सिंह | कविता


जाड़े की रात
      - डॉ शरद सिंह

जाड़े की रात ने
सूरज से मांगी
एक सुबह
घर की दीवारों ने
मांगी अलावों से
गरमाहट
मैंने जो मांगा
अपनेपन में डूबी
इक आहट
तब से वो
मौन ओढ़ बैठा है
मैंने क्या उससे
कुछ ज़्यादा मांग लिया?

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25 November, 2017

जाड़े की रात. .. डॉ शरद सिंह

Winter ... Poetry of Dr Miss Sharad Singh

जाड़े की रात
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कमरे के बाहर
सूनी सी सड़कों पर
टहल रही
जाड़े की रात

बर्फीला सन्नाटा
देह को जमाए

लेकिन है देता
गरमाहट ढेर सी
यादों के कोट में
लगा हुआ
 प्रेम का अस्तर।

- डॉ शरद सिंह

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