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14 June, 2017

कभी तो ठहरो ... डॉ. शरद सिंह


Poetry of Dr (Miss) Sharad Singh


कभी तो ठहरो
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कल तुम फिर छोड़ गए मुझे
रीती हुई चाय की प्याली की तरह
न भाप, न तरल
न उष्मा, न ऊर्जा
बेहिसाब थकन
मन की टूटन
बस, कुछ धब्बे तलछट में
एक धब्बा किनारे पर
होठों का
वही होंठ जिनसे कहा था तुमने
‘‘फिर मिलेंगे, जल्दी ही’’

कभी तो ठहरो,
भर जाने दो प्याली फिर से
और फिर से उठने दो
गर्म भाप विचारों की।

- डॉ. शरद सिंह

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