अनुगूंज
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
उदासी की बूंदें
टपक रही
टप-टप
मन की
रिक्त बाल्टी में...
बूंदें छोटी
पर
अनुगूंज बहुत बड़ी...
कब भरेगी बाल्टी
कब थमेगी ध्वनि
पता नहीं
जीवन के दिवस में
रात का साया
कुछ ज़्यादा ही
गहराया...
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