28 March, 2026

इंतज़ार रहता है | डॉ (सुश्री) शरद सिंह | शायरी

सुबह   से   शाम  तेरा  इंतेज़ार  रहता है।
तू आएगा ये हवाओं का रुख भी कहता है।
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह
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