12 January, 2026

चूल्हा | कविता | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

भूख, गरीबी का किस्सा है, छै ईंटों का चूल्हा।
बेघर जीवन का हिस्सा है, छै ईंटों का चूल्हा।
- डॉ (सुश्री) शरद सिंह

Photo by #DrMissSharadSingh 

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