गुरुवार, मार्च 30, 2017

बंद खिड़कियां ....

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh

जाने   कितने   राज़   छिपाये   रहती हैं
बंद खिड़कियां फिर भी कुछ तो कहती हैं
कुछ झगड़े, कुछ मीठी बातें   झिरियों से
यादों  की  धारायें   बन   कर  बहती हैं
- डॉ. शरद सिंह 

 (*झिरियों = दरारों)

#Shayari #SharadSingh

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