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22 January, 2021

मन में घाव उकेरे | डाॅ (सुश्री) शरद सिंह | नवगीत संग्रह | आंसू बूंद चुए

Dr (Miss) Sharad Singh

नवगीत

मन में घाव उकेरे
       - डाॅ सुश्री शरद सिंह

जब से 
दुख ने नाता जोड़ा
सपने चूर हुए
अपनों से
लगने वालों के
मुखड़े दूर हुए।

नागफनी-सा
दर्द उभर कर
मन में घाव उकेरे
भरी दुपहरी
घिर-घिर आए
पलकों तले अंधेरे

जब से
सबने रस्ता छोड़ा
घर नासूर हुए
सूने से 
आंगन में ठंडे
दिन तंदूर हुए।

टुकड़ा-टुकड़ा 
होता जीवन
हाथों फिसला जाए
पोर-पोर पर
दुखती चाहत
गुमसुम गीत सुनाए

जब से 
सूरज हुआ निगोड़ा
रंग बेनूर हुए
छाया से
लगते ये रिश्ते
नामंज़ूर हुए।
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(मेरे नवगीत संग्रह ‘‘आंसू बूंद चुए’’ से)
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