मंगलवार, अक्तूबर 31, 2017

मुस्कुराना सीख लो .... डॉ शरद सिंह

A Ghazal by Dr (Miss) Sharad Singh

 
ज़िंदगी कांटों भरी, दामन बचाना सीख लो
मुश्किलों में भी ज़रा तुम मुस्कुराना सीख लो
क्या पता कब मौत आ जाए चुराने के लिए
दो घड़ी तो साथ अपनों के बिताना सीख लो
- डॉ शरद सिंह


#SharadSingh #Shayari #Zindagi #Muskurana #Mushkilen #Daman #Maut #Seekh

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (01-11-2017) को
    गुज़रे थे मेरे दिन भी कुछ माँ की इबादत में ...चर्चामंच 2775
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. मेरी रचना ‘चर्चा मंच’ में शामिल करने के लिए अत्यंत आभार रूपचन्द्र शास्त्री मयंक जी!
      आपका स्नेह इसी तरह सदा बना रहे!

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  2. बहुत ही लाजवाब ... जिंदादिल ... जीवन का सन्देश देता मुक्तक ...

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