सोमवार, अप्रैल 03, 2017

ऐसा लगता है ...

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh

सूखी पत्ती  पैरों में दब  कुछ न कुछ तो  बोलेगी
दबी ज़िन्दगी का  हर पहलू   धीरे -धीरे खोलेगी
इतनी ज़्यादा दुखी दिखाई देती है, चिट्ठी पढ़ कर
ऐसा लगता है वह जा कर तक़िया अभी भिगो लेगी
- डॉ शरद सिंह
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