28 November, 2019

डॉ शरद सिंह @ कनॉट प्लेस, सरवन भवन, नई दिल्ली

 Dr Sharad Singh @ Connaught Place, Saravana Bhavan, New Delhi
कनॉट प्लेस (Connaught Place), नईदिल्ली में एक साउथ इंडियन रेस्टोरेंट है- सरवन भवन (Saravana Bhavan) जहां मुझे मसाला डोसा से अधिक पसंद आया वहां का पीतल के लोटों से बनी पार्टीशन वॉल... कस्टमर्स के लिए वह एक सेल्फी प्वाइंट है... वाकई देखने और याद रखने लायक....  
😊🍪🥘🍟🍱 ☕
(02.11.2019, evening)
 Dr Sharad Singh @ Connaught Place, Saravana Bhavan, New Delhi
 Dr Sharad Singh @ Connaught Place, Saravana Bhavan, New Delhi
 Dr Sharad Singh @ Connaught Place, Saravana Bhavan, New Delh
 Dr Sharad Singh @ Connaught Place, Saravana Bhavan, New Delh

27 November, 2019

यादें... ग़ज़ल... डॉ शरद सिंह

किसी किताब में इक फूल सी दबी यादें
दिखी हैं आज हथेली पे वो रखी यादें
       - डॉ. शरद सिंह

05 November, 2019

साहित्य की भी बेड़ियां हैं तो फिर कैसे एक रचनाकार दुनिया को आजादी सौंपता...



साहित्य की बेड़ियां

साहित्य आजतक के मंच पर बाएं से आजतक के एंकर नवीन कुमार , भगवानदास
मोरवाल , डॉ. शरद सिंह साहित्य की बेड़ियां पर चर्चा करते
हुए।

27 October, 2019

रूप चतुर्दशी एवं नरक चतुर्दशी की हार्दिक शुभकामनाएं - डॉ शरद सिंह

Dr (Miss) Sharad Singh in Roop Chaturdashi 2019

Dr (Miss) Sharad Singh in Roop Chaturdashi 2019

Dr (Miss) Sharad Singh in Roop Chaturdashi 2019

Dr (Miss) Sharad Singh in Roop Chaturdashi 2019

Dr (Miss) Sharad Singh in Roop Chaturdashi 2019

Dr (Miss) Sharad Singh in Roop Chaturdashi 2019

Dr (Miss) Sharad Singh in Roop Chaturdashi 2019

Dr (Miss) Sharad Singh in Roop Chaturdashi 2019

Dr (Miss) Sharad Singh in Roop Chaturdashi 2019

08 October, 2019

दशहरे की हार्दिक शुभकामनाएं - डॉ शरद सिंह

Happy Dusshera - Dr (Miss) Sharad Singh
जो हृदय में सत्य हो तो
नाश  होता है  असत  का
है वही श्रीराम-सा,  जो
ध्यान  रखता है जगत का
- डॉ शरद सिंह

28 September, 2019

वरना वो भी सुधर गया होता ( ग़ज़ल )... डॉ शरद सिंह

 
Varna Vo Bhi Sudhar Gaya Hota ... Ghazal of Dr (Miss) Sharad Singh
  
ग़ज़ल
 
 - डॉ शरद सिंह
 
अश्क़ आंखों से  बह गया होता
दिल का दरिया उतर गया होता

ग़म को  रक्खा है  बंद  मुट्ठी में
वरना सब पे  बिखर गया होता

गर   कोई  इंतज़ार  करता तो
शाम  होते  ही  घर  गया होता

उसकी मां ने  उसे नहीं डांटा
वरना वो भी  सुधर गया होता

वो 'शरद' को अगर समझ लेता
दुश्मनी को बिसर गया होता
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हलफ़ उसने उठा रक्खा ( ग़ज़ल )... डॉ शरद सिंह

Halaf Usane Utha Rakha ... Ghazal of Dr (Miss) Sharad Singh

 ग़ज़ल 

 - डॉ शरद सिंह

जला भी दो बही-खाता, भलाई का,  बुराई का
हलफ़ उसने उठा रक्खा है हमसे बेवफ़ाई का
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