17 December, 2025

शायरी | रिश्तों की तासीर | डॉ (सुश्री) शरद सिंह

अर्ज़ है
पत्ते पीले हो कर, सब्ज़ नहीं होते 
इनसे समझो रिश्तों की तासीर कभी
-डॉ (सुश्री) शरद सिंह

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4 comments:

  1. बिल्कुल ठीक फरमाया आपने ।

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  2. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर गुरुवार 18 दिसम्बर 2025 को लिंक की जाएगी है....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!

    !

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