बुधवार, जून 20, 2012

तेरे मेरे बीच की .....


31 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर पंक्तियाँ सुन्दर चित्र ।

    बधाई डाक्टर साहिबा ।।

    क्षमा सहित -

    देखें सुन्दर चित्र तो, लगता बड़ा विचित्र ।

    ताक रहा अपलक झलक, मनसा किन्तु पवित्र ।

    मनसा किन्तु पवित्र, झलकती कैंडिल लाइट ।

    किरणें स्वर्ण बिखेर, करे हैं फ्यूचर ब्राइट ।

    दूर बसे सौ मील, मीत कर्मों के लेखे ।

    ऋतु आये जो शरद, साल हो जाए देखे ।।



    टिप्पणी मात्र है -

    उत्तर देंहटाएं
  2. तुझ में मुझ में कितनी दूरी.

    फिर भी मिलती श्वासें पूरी.

    तुम बिन मिलकर मिल जाती हो.

    तुम हो किस-किसकी मजबूरी.

    उत्तर देंहटाएं
  3. उत्तर
    1. प्रतिक्रिया देने के लिये बहुत-बहुत धन्यवाद...

      हटाएं
  4. बहुत खूब...सुन्दर प्रस्तुति.

    उत्तर देंहटाएं
  5. प्रस्तुति चर्चा मंच पर, मचा रही हडकम्प ।

    मित्र नहीं देरी करो, मार पहुँचिये जम्प ||

    --

    शुक्रवारीय चर्चा मंच

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपकी आत्मीय टिप्पणी के लिए आभारी हूं...

      हटाएं
  6. उत्तर
    1. आपका स्नेह मेरे दोहे को मिला..यह मेरा सौभाग्य है.

      हटाएं