सोमवार, अप्रैल 24, 2017

ज़िन्दगी भी अज़ब पहेली है ... - डॉ शरद सिंह

Shayari of Dr (Miss) Sharad Singh
सांस दुश्मन है या सहेली है
ज़िन्दगी भी अज़ब पहेली है।
मौत आती है साथ पाने को
यूं तो रहती सदा अकेली है। - डॉ शरद सिंह


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