24 December, 2012

हादसा ....


11 comments:

  1. वहां तो एक भीष्म थे पर यहां तो न जाने कितने भीष्म हैं.

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  2. आपकी लाजवाब करती सम सामयिक प्रस्तुति को समर्पित

    न होगा हादसा न आंसू ये तमाशा बनने देंगे.
    क्यूँ होगा मौन जन आत्मा तपे संताप से यूँ?

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  3. बेहतरीन शब्द, पंक्तियाँ बधाई

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  4. पुरे हादसे का दर्द बयाँ कर दिया आपने ......
    निशब्द!

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  5. मौन क्यों दरबार है,
    विदुर-स्वर क्यों हार है?

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  6. बहुत सुन्दर और सार्थक लेखन ....

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  7. बस.... इसके बाद कुछ कहने को रह ही कहां जाता.......

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  8. फिर सभा दुर्योधनों की सज गई ...
    बहुत शर्म की बात है यह !

    2014 में अवसर होगा दुर्योधनों की सभा ध्वस्त करने का ...

    सदैव बहुत अच्छा लिखती हैं आप
    आदरणीया डॉ. शरद सिंह जी !


    आभार सहित
    नव वर्ष की अग्रिम शुभकामनाएं…
    राजेन्द्र स्वर्णकार

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